क्रांतिकारी विनायक सावरकर जयंती पर विशेष
स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर जयंती
२८ में १८८३को जन्म, नाशिक, महाराष्ट्र
सावरकर महान साहित्यकार, क्रांतिकारी, कवि, वकील और समाज सेवक थे।
नाशिक के भगुर गांव में जन्मे विनायक सावरकर महज ९ वर्ष के थे जब हैजे ने उनकी मां को उनसे छीन लिया, और १६ वर्ष के हुए तब पिता भी प्लेग की महामारी में चल बसे और तीन भाई एक बहन का परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा , बड़े भाई गणेश ने परिवार का बीड़ा उठाया।
१९०१ में दसवीं के बाद उच्च शिक्षा का रुख किया। पुणे के कॉलेज से BA किया।लंदन भी गए जहां लाला हरदयाल से मुलाकात हुई, अभिनव भारत संगठन की स्थापना हुई।
सावरकर ने हिंदुत्व की भावना को प्रबल किया और सभी हिन्दू समाज को एकत्र करने का काम किया।
ब्रिटिश नाराज थे।
नाशिक के कलेक्टर की हत्या का आरोपी बनाते हुए कालापानी की सजा मिली और पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल में चार साल से अधिक समय काटा जहां कोल्हू में बैल के समान काम करवाया जाता, नारियल से तेल निकलवाया जाता। पहाड़ी एरिया, जंगलों की सफाई करनी पड़ती, जमीन समतल करना पड़ता जो बहुत ही मेहनत का काम होता और यदि रुक गए तो ब्रिटिश अधिकारी बेंत और कोड़े से मारते थे। इतनी मेहनत के बावजूद भरपेट खाना न मिलता। आखिरकार बाल गंगाधर तिलक के समझाने पर सावरकर ने मरसी पिटिशन लिखकर ब्रिटिश सरकार को दिया और तब रिहाई हुई।
सावरकर ने १९४७ में भारत के विभाजन का भी विरोध किया था। सावरकर के क्रांतिकारी विचार उस समय के कई अखबारों में छपते थे। १८५७ के भारतीय बनाम ब्रिटिश विरोध से हुए लड़ाई को प्रथम स्वाधीनता संग्राम सावरकर ने ही कहा था। १९३१ में बंबई में हुए अस्पृश्यता उन्मूलन सम्मेलन की भी अध्यक्षता की। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के १९ वें राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुने गए।
वह १९३७ में बाल गंगाधर तिलक की डेमोक्रेटिक स्वराज पार्टी में भी शामिल हुए थे।
अंतिम दिनों में विनायक सावरकर दादर ,मुंबई में रहने लगे थे। १९६६ में उनका देहांत हुआ।
क्रांतिवीर स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर अमर रहे।
जय हिंद! जय भारत!!
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