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आज लाल बहादुर शास्त्री, दूसरे प्रधानमंत्री का भी जन्मदिवस

लाल बहादुर शास्त्री: भारत रत्न

उत्तर प्रदेश के श्रीवास्तव परिवार में जन्मे ०२ अक्टूबर १९०४ को लाल बहादुर श्रीवास्तव ने स्कूली और स्नातक शिक्षा के बाद १९२० में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपना अहम योगदान दिया।लाला लाजपत राय द्वारा संस्थापित सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसायटी के अध्यक्ष भी रहे और कांग्रेस पार्टी में भी कद बढ़ा। मुजफ्फरपुर में जाती गत मतभेद के खिलाफ आंदोलन किया।महात्मा गांधी से प्रभावित होकर श्रीवास्तव सरनेम अपने नाम के आगे से हटा दिया।
वह १९६४ अप्रैल से १९६६, ११ जनवरी तक प्रधानमंत्री के रूप में दूसरे लीडर रहे।
१९६५ के भारत पाकिस्तान युद्ध के समय उनकी बतौर पी एम बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही। किसानों का बल बढ़ाने, भारत को भुखमरी की स्थिति से बाहर निकालने के लिए देश को आवाहन किया कि यदि अमीर वर्ग एक समय का उपवास सप्ताह में रख लें तो देश की बड़ी आबादी को भोजन पर्याप्त हो सकता है। जय जवान जय किसान का नारा इन्होंने ही दिया।सेनाओं का मनोबल बढ़ाया। १० जनवरी को ताशकंत समझौते पर हस्ताक्षर किया और ११ जनवरी को हार्ट अटैक से शास्त्री जी की मौत हो गई।( वैसे यह अब भी रहस्य है)।
आपने नेहरू सरकार में रेल मंत्री के रूप में सेवा दी , भीषण रेल दुर्घटना का जिम्मा लेते हुए नैतिक रूप से आपने आपदा रेल मंत्री पद त्याग दिया। वह बाह्य मामलों के मंत्री भी रहे और गृह मंत्री भी डेढ़ वर्ष तक रहे।
शास्त्री जो को श्वेत क्रांति और हरित क्रांति के प्रणेता के रूप में जाना जाता है। दुग्ध उत्पादन के संवर्धन हेतु अमूल डेयरी एवं नेशनल डेयरी बोर्ड के स्थापना हेतु भी श्रेय शास्त्रीजी को जाता है।
आप ने हरित क्रांति के लिए भी पहल की जिससे अनाज का उत्पादन बढ़े। 

शास्त्री जी बेहद गरीब किसान परिवार से थे। बचपन में स्कूल के कुछ विद्यार्थियों के साथ आम के बगीचे में गए जहां कुछ बच्चों ने पत्थर मारकर आम तोड़ना चाहा।आम के गिरने और उसकी आवाज से वहां का माली दौड़कर चिल्लाते हुए आया , तब तक सब बच्चे भाग चुके थे, शास्त्री जी पकड़े गए। माली ने धमकाया ,तुम श्रीवास्तव के बच्चे हो शायद, इसलिए तुम पढ़ते हो, चोरी से आम तोड़ते हुए, तुम्हे चोरी करते शर्म नहीं आती? इन घुड़कियों से शास्त्री जी डरे नहीं लेकिन सफाई दी कि मैंने पत्थर नहीं मारा और मेरे पास आम भी नहीं। अपना जेब भी दिखा दिया। माली ने कहा ,बेटा लाल..जैसे बच्चों के साथ रहोगे ,वैसा ही लोग तुम्हे समझेंगे। 

इसी लाइन ने शास्त्री की जिंदगी बदल दी। यही बच्चा आगे चलकर लाल बहादुर शास्त्री के रूप में देश का दूसरा प्रधानमंत्री बना। इस समय देश के राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।

निश्चित रूप से महान राजनेताओं की सूची में शास्त्री जी का नाम बहुत ही कर्मठ, कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार राजनेता, कुशल प्रधानमंत्री के रूप में शामिल है।

भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर विनम्र आदरांजलि।

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