मुंबई रेलवे पर भड़का हाय कोर्ट/ हम रेलवे सेफ्टी एक्सपर्ट नहीं, नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो जरूरी, वह तुरंत करे रेलवे प्रशासन/ रोज 10 मुंबई कर रेलवे यात्रा में मरते हैं: मुंबई उच्च न्यायालय
९ जून को CSMT की ओर जानेवाले फास्ट लोकल से अत्यधिक भीड़ के चलते मुंब्रा के निकट ट्रैक पर दर्जन से ज्यादा लोग गिर गए, पांच की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
इस घटना के बाद सामान्य यात्री यतिन जाधव ने जनहित याचिका दायर की थी जिसके तहत रेलवे ने एफिडेविट लगाया था जिस पर सुनवाई शुक्रवार २० जून को हुई।
एफिडेविट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष २०२४ में ३५८८ लोग रेलवे यात्रा के दौरान मुंबई में मरे हैं।यानी औसतन हर दिन १० मुंबई कर रेलवे यात्रा के दौरान मरते हैं।
यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्यों कि पूरी दुनिया में टोक्यो के बाद भारतीय रेलवे को दूसरा स्थान दिया गया है जो व्यस्तम रेलवे नेटवर्क है।
मुंबई उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायाधीश आलोक अराधे, न्यायमूर्ति संदीप मारने की बेंच ने इस पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि भले ही आप(वेस्टर्न, सेंट्रल रेलवे) यह कह रही है कि२००९ के मुकाबले अब ४६प्रतिशत कम मौतें हो रही हैं लेकिन यहपर्यप्त और संतोषजनक नहीं है। नागरिकों को सुरक्षा के लिए जो कदम उठाया जाना चाहिए , वह तुरंत उठाए।
एक सामान्य यात्री यह सुझाव देता है कि लोकल ट्रेन के दरवाजे ऑटोमेटेड हों, वह तुरंत किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्तियों ने कहा कि मुंब्रा की दुर्घटना फिर न दोहराई जाए, इसे सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है।
हम रेलवे सेफ्टी एक्सपर्ट नहीं लेकिन आम आदमी सुझाव दे रहा है। रेलवे को गंभीरता से इस पर काम की जरूरत है।रेलवे प्रबंधन को आड़े हाथ लेते हुए न्यायालय ने कहा कि मुंब्रा दुर्घटना की जांच के लिए जो पैनल बनी है उसमें शामिल अधिकारियों के नाम , उनकी शैक्षणिक अन्य योग्यता को भी रेलवे बताए।
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने रेलवे की ओर से न्यायालय को बताया कि ट्रेन से जुड़े मामलों में सुविधाजनक काम सिर्फ रात मे ही संभव होता है जब ट्रेन सर्विस बंद की जाती है। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि रेलवे ट्रैक के बीच दीवार बने ताकि लोग रेलवे ट्रैक क्रॉसिंग नहीं करें। प्लेटफॉर्म और रेलवे ट्रेन के बीच गैप को न्यूनतम करने के प्रयास जारी हैं।
ऑटोमेटेड डोर सिस्टम पर सरकार कार्यरत है।
न्यायालय ने कहा कि लोग ट्रैक के निकट मौजूद पोल से टकराकर गिरते हैं, ट्रेन और प्लेटफार्म के बीच गैप में फंसकर लोग मर जाते हैं।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई १४ जुलाई से पहले रिले अपना विस्तृत प्लान कोर्ट को लिखित रूप से जमा करे। जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है वह हमें बताए, हम सुनिश्चित करेंगे कि वह सारे ठोस कदम उठाए जाएं और पूरे किए जाएं।
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