इंडसइंड बैंक डेरिवेटिव पोर्टफोलियो की फोरेंसिक ऑडिट करेगा PWC ग्रुप
इंडसइंड बैंक डेरिवेटिव पोर्टफोलियो मामला/ प्राइस वाटर कूपर हाउस को फोरेंसिक ऑडिट के लिए बैंक बोर्ड ने किया नियुक्त।मार्च अंत तक रिपोर्ट पेश होने की उम्मीद।1600 करोड़ तक नेटवर्थ में हो सकती है कमी।
इंडसइंड बैंक ,हिंदुजा ग्रुप द्वारा संचालित देश की दिग्गज प्राइवेट सेक्टर बैंक है। हाल ही में कुछ समय पहले बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में कुछ अनियमितता देखी गई जिसके बाद जनवरी में बनी के सीएफओ यानी चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर गोबिंद जैन ने जनवरी में इस्तीफा दे दिया।
बैंक के दोनों ऑडिटर MP चितले एंड एसोसिएट्स , MSKA & एसोसिएट्स द्वारा निवेदन के बाद बैंक प्रबंधन ने पोर्टफोलियो के फॉरेंसिक ऑडिट के लिए PWC को नियुक्त किया गया है। PWC की रिपोर्ट मार्च अंत तक आने की उम्मीद है।
इस बीच रिजर्व बैंक ने बुलेटिन जारी की है कि बैंक की कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो CAR १६.६६% है जो कि नियमानुसार १५ प्रतिशत की मूल जरूरत से अधिक है।लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो ११३ प्रतिशत है जो न्यूनतम आवश्यकता १०० प्रतिशत से अधिक है।
बैंक के सीईओ सुमंत कठपालिया का कार्यकाल हाल ही में १ वर्ष के लिए फिर बढ़ाया गया है।
बोर्ड ने तीन साल की सिफारिश की लेकिन रिजर्व बैंक ने १ साल के लिए ही एक्सटेंशन दिया है।
कठपालिया का कहना है कि डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में अनियमितता पिछले पांच सात साल से हो रही थी अब हमने इसका आंकलन किया है। फॉरेंसिक ऑडिट भी PWC के निर्देन में होने जा रहा है।
अब तक पिछले वर्ष की तुलना में YoY स्टॉक प्राइस ५४ प्रतिशत तक और पिछले ६ माह में २७ प्रतिशत तक घट गया है।
वित्तीय विश्लेषकों के मुताबिक डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में अनियमितता के चलते बैंक के नेटवर्थ में २.३५ %, लगभग १६०० करोड़ रूपये कम हो सकता है। बैंक का मार्केट कैप घटकर ७० हजार करोड़ हो चुका है।
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