0 महाराष्ट्र में नहीं रुक रही किसानों की आत्महत्या? पिछले साल ही २७०६ किसानों ने की आत्महत्या। विधानसभा में मंत्री मकरंद जाधव (पाटिल) का बयान। - Khabre Mumbai

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महाराष्ट्र में नहीं रुक रही किसानों की आत्महत्या? पिछले साल ही २७०६ किसानों ने की आत्महत्या। विधानसभा में मंत्री मकरंद जाधव (पाटिल) का बयान।

महाराष्ट्र में २०२४ में २७०६ किसानों ने आत्महत्या की? राज्य के मंत्री मकरंद जाधव ( पाटिल) का विधानसभा में बयान। किसानों को न्याय दिलाने में फेल हो रही सरकार ?

१३ मार्च को देश होलिका दहन कर रहा था, महाराष्ट्र में भी कोने कोने में इस पवित्र दिन पर लोग होलिका दहन कार्यक्रम मना रहे थे। इसी दिन बुलढाना के देओल गांव स्थित राजा तालुका के किसान कैलाश अर्जुन नगर ने जहर पीकर जान दे दी।
कैलाश नागरे को महाराष्ट्र सरकार ने युवा किसान सम्मान दिया था।
कैलाश को २०२० में महाराष्ट्र सरकार ने युवा किसान का सम्मान दिया था। वह कुछ महीनों से खड़कपूर्ण बांध से पानी लेकर खेतों की सिंचाई करना चाहता था, लेकिन उसके और उसके जैसे कई किसानों की इस विनती को सरकार ने ध्यान नहीं दिया। कैलाश नागरे ने सुसाइड नोट में अपने आत्महत्या के लिए अपना पक्ष भी लिखा है।
सिर्फ पिछले साल ही कैलाश जैसे हजारों किसानों ने आत्महत्या कर ली। राहत एवं पुनर्वासन मंत्री मकरंद जाधव ( पाटिल) ने विधानसभा में यह आंकड़ा २७०६ बताया है। 

बीड जिले से २०५, अमरावती से २००, अकोला से १६८, विदर्भ से ११२ किसानों ने आत्महत्या की। २७०६ में से १५६३ किसानों को आर्थिक सहायता के लिए शासन ने योग्य भी माना था।

११०१ किसानों के परिवार को चेक द्वारा ३० हजार,  बैंक की मासिक आय योजना के तहत ७० हजार,  कुल मिलाकर १ लाख की मदद दी गई है।
कुल २७०६ किसान मराठवाड़ा एवं विदर्भ परिसर से हैं जिन्होंने १ जनवरी २०२४ से लेकर ३१ दिसंबर २०२४ के बीच आर्थिक परेशानी, कर्ज का बोझ, सूखा, पानी सिंचाई की कमी, फसल को पर्यावरण की वजह से हुए नुकसान, जलवायु परिवर्तन इत्यादि कारणो से आत्महत्या कर ली।
महाराष्ट्र सरकार को इस पर विशेष चिंता की आवश्यकता है।एक तरफ देश के प्रधानमंत्री किसान को अन्नदाता कहते हैं। राज्य के मुखिया भी अन्नदाता का सम्मान करते हैं और दूसरी ओर बढ़ती आत्महत्याएं कुछ और ही दर्द बयान कर रही हैं।

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