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भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती आज

सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले जयंती

यह कोई साधारण नाम नहीं है। आज अगर भारतीय महिलाएं पढ़ लिख रही हैं, विश्व में अपना कीर्तिमान बना रही है तो इसका श्रेय इन्हीं सावित्रीबाई फुले को जाता है। यह शिक्षा की वह क्रांति उस दौर में लाई जब बाल विवाह का चलन जोरो पर था, महिला को सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित रखा गया था। पुरुष प्रधान समाज महिला को शिक्षा दें ऐसी कल्पना करना भी असंगत मानता था।
सावित्री बाई जब घर से निकलती तो उन पर लोग रास्ते में  कीचड़ से सना हुआ गंदे पानी की बाल्टी डाल देते और पूरी साड़ी कीचड़ से लथपथ हो जाती। वह दूसरी साड़ी थैली में लपेटे ले जाती।जहां उनको पढ़ाना होता, वहां पहुंचकर साड़ी बदलती और पढ़ाना शुरू कर देती। कई महिलाओं को पढ़ने की लाख जगाने में जो क्रांति सावित्री बाई फुले ने लाई वह किसी चमत्कार से कम नहीं था और आखिर इस पुरुष प्रधान समाज में महिला शिक्षित होने लगी।
आज ऐसे महान भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई की जन्मजयंती है। फुले दंपति ने भारत का सबसे पहला महिला आधारित स्कूल पुणे के तात्यासाहेब भिड़े के निवास स्थान में १८४८ में शुरू किया था। महिलाओं, जाति पर आधारित भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों का फुले दंपति ने विरोध किया और सामाजिक जागरूकता में अहम योगदान दिया।

तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी में ३ जनवरी १८३१ में  जन्मी सावित्रीबाई ने पुणे में ही ६६ वर्ष की उम्र में  १० मार्च १८९७ के दिन आखिरी सांस ली।

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