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बटुकेश्वर दत्त महान क्रांतिकारी की जयंती पर विशेष

बटुकेश्वर दत्त..महान आंदोलनकारी की जयंती आज 

भारत माता की स्वातंत्र्य गाथा में कई महान सपूतों ने बलिदान दिया जिनमें बटुकेश्वर दत्त भी थे।
१९ नवंबर १९१० को जन्मे बटुक ने महज १९ साल की उम्र में ब्रिटिश सेंट्रल असेंबली में  भगत सिंह के साथ मिलकर दो बम फेंके। यह समय था पब्लिक सेफ्टी बिल लागू करने का जिसके तहत ब्रिटिश पुलिस को खुली छूट दी जाती कि किसी भी क्रांतिकारी के साथ कैसा भी व्यवहार करे।
दो बम फटे भी और पूरी सेंट्रल असेंबली में धुंआ फैल गया।कुछ को हल्की चोटें आईं लेकिन किसी की जान नहीं गई।
बटुकेश्वर और भगत सिंह दोनों ने कबूला कि जन बूझकर विजिटर गैलरी से असेंबली में बम उन्होंने फेंका। पब्लिक सेफ्टी बिल, ट्रेड रूल्स, लाला लाजपत राय की हत्या से नाराज होकर यह कारनामा किया गया था। बम फोड़ने के बाद इंडियन सोशलिस्ट रेपिलिकन एसोसिएशन के पंपलेट सभा में फेंके गए जिसमें कई मांगे लिखी हुई थीं। इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए जिसके बाद अंग्रेज तिलमिला उठे थे।

ब्रिटिशों ने दोनों को गिरफ्तार किया और आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।
जेल में बंद कई भारतीय राजनेताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा था इसलिए बटुक और भगत सिंह ने ६३ दिनों तक भूख हड़ताल की और ब्रिटिश हुकूमत उनकी कुछ मांगों को मान ली। जनता के बीच भगत और बटुक की जोड़ी सर चढ़कर बोलने लगी थी और अंग्रेजी सरकार दबाव में आ रही थी। 

१९४२ में बटुक बाहर आए लेकिन उन्हें टीबी हो गई, फिर भी महात्मा गांधी के आवाहन पर भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े  और गिरफ्तारी हुई, ४ साल के लिए फिर जेल पहुंच गए। बहुत बुरा सलूक किया था जालिम अंग्रेजी हुकूमत ने।

१९४७ में देश के आजाद होने के बाद बटुकेश्वर दत्त ने अंजलि से विवाह किया , उन्हें भारती नाम से बेटी भी हुई। हालांकि स्वतंत्र भारत में बटुकेश्वर का कोई सम्मान नहीं हुआ। किसी ने सुध नहीं ली।बहुत ही गरीबी में जीना पड़ा। आजीविका के लिए ट्रांसपोर्ट का काम करना पड़ा। १९६५ में बटुक ने  दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली।

(जेल से बाहर आने के बाद बटुकेश्वर दत्त)

बटुकेश्वर दत्त इंडियन सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन क्रांतिकारी संस्था के सदस्य थे जिससे भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव थापर जैसे महान क्रांतिकारी जुड़े हुए थे।

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