मुंबई उपनगर बोईसर में देवी मंदिर में भक्तो का लगा तांता, देवी भागवत सप्ताह की हो रही कथा। वर्षों पुराना मंदिर है विशाल आस्था का केंद्र।
बोईसर मान वाली माता जी....
नवरात्रि में यहाँ मां के भक्तों का मेला लगा रहता है. यहाँ इनदिनों मंदिर के मुख्य पुजारी गुरूजी की श्रीमद देवी भागवत सप्ताह चल रही है. बहुत सुन्दर कथा सुनने का सौभाग्य यहाँ के देवी भक्तो को मिल रहा है।
कल की कथा में परीक्षित परिचय,भगवान सुकद देव का जन्म, देवी भागवत के महात्म पर गुरूजी ने प्रकाश डाला. भगवान शंकर औऱ मां पार्वती संवाद की चर्चा की. बहुत ही सरल शब्दों में देवी माँ का हम सब के जीवन में क्या महत्व है उस पर बहुत सी जानकारी श्रोताओं देवी भक्तो को दी गई ।
प्रेम शंकर तिवारी ज़ी, शर्मा ज़ी आदि की टीम अपने गायन वादन से इस संगीतमय देवी कथा को औऱ सुन्दर बना रहे हैँ। यहाँ लोगों की मान्यता के अनुसार भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।
मां की मूर्ति इतनी सजीव कि मानो अभी बोल पड़ेंगी. क्षितिज जी ने कहा कि संसार के सारे जीवों की श्रोत को मैं सजीव कह रहा हूं. इसीलिए शायद लगभग हर आरती में भक्तों के लिए मुर्ख शब्द लिखा है।
ॐ जय जगदीश हरे में - मैं मूरख खल खल कामी, इसी तरह हनुमान चालीस में -बुद्धि हीन तनु जानिके सुमरो पवन कुमार. मां अष्टसिद्धि देने वाली,आठ दिशाओं में एक साथ अपने हाथों को फैलाने वाली, शक्तिशाली शेर पर बैठने वाली हैं.साधारण इस शरीर के हमारे माता पिता भी अपने बच्चों से धन से ज़्यादा भाव पूर्ण प्यार चाहते हैं।
संसार जिसकी कोख से जन्मा है, कभी किसी का नुकसान कर ही नहीं सकती. हमारे कर्मों से ही, हमारी सोच से हमें कष्ट मिलता है.उसके पास तो कष्ट जैसी कोई चीज है ही नहीं।
औऱ देवी देवताओं की पूजा आराधना दिन में होती है. शिव औऱ माता जी की पूजा अँधेरे की प्रतीक रात में भी होती है. संसार में ज़्यादातर रचना अँधेरे में होती है. ब्रह्माण्ड की भी जब बात होती है, तब भू वैज्ञानिक किसी ब्लैकहोल की बात करते हैं. गर्भ भी तो अँधेरे में पलता है. शायद इसीलिए जिसके गर्भ से संसार जन्मा है. उसकी औऱ जिसके यहाँ से सम्पूर्ण ऊर्जा निकली है शिव दोनों की पूजा रात्रि में की जाती है. शिवरात्रि औऱ नवरात्रि इसके आलावा सब दिन में. मान के मंदिर में नवरात्रि भर पूजा अर्चना होती है,आखिरी दिन भक्तों के लिए महाप्रसाद भंडारा होता है. सैकड़ो कलश यहाँ स्थापित किए जाते हैं. लोग अपने कलश की पूजा के लिए सुबह शाम रोज आते हैं. कुछ सेवादार हमेशा सेवा में लगे रहते हैं. ग्रामीण वातावरण का यह मंदिर, बोइसर औऱ आसपास के लोगों के साथ साथ मुंबई, कल्याण तक के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
महाराष्ट्र सरकार के साहित्य अकादमी से पुरस्कृत लेखक, आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन करने वाले चिंतक, दर्शनिक विचारक डॉ. रमाकांत क्षितिज ने कल की कथा में कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर बोलते हुये उन्होंने भारतीय सनातन संस्कृति पर प्रकाश तो डाला ही, साथ ही साथ भगवान विष्णु के अवतारों के वैज्ञानिक औऱ आध्यत्मिक महत्व पर आज की परिस्थितियों से जोड़कर आज की युवा पीढ़ी को उसके जीवन से जोड़कर बताया।
पश्चिम के डार्विन ने हमारे ही भगवान विष्णु के अवतारों को अपना सिद्धांत बनाकर दुनियां के सामने पेश किया यह भी बताया. सैकड़ो की संख्या में देवी भक्त इस कथा का प्रतिदिन आनंद ले रहे हैं।
आरती के समय जो वातावरण बनता है उसका बखान शब्दों में नही किया जा सकता. उसका तो आनंद यहाँ उपस्थिति रहकर ही लिया जा सकता है। नवरात्रि के उत्सव में मान मंदिर बोइसर क्षेत्र में देवी भक्तो के लिये विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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