संक्षिप्त में विशेष
सीएम शिंदे के गृह क्षेत्र स्थित अस्पताल में २१ नवजात शिशुओं की मौत पर सदन में हंगामा
११.५ मैट्रिक टन कचरे से मरीन ड्राइव का चेहरा बदला, रातों रात मनपा ने किया साफ, अगले दिन सुबह ७.३० बजे से क्रिकेट टीम की थी परेड
विश्व विजेता भारतीय क्रिकेट टीम को देखने पहुंची हजारों की भीड़ ने सागर किनारे, सड़कों पर ११.५० मैट्रिक टन कचरा छोड़ा, मनपा कर्मचारियों के छूटे पसीने।
मरीन ड्राइव में मेगा क्लीन अप ड्राइव के तहत मनपा कर्मचारियों ने दो डंपर, पांच जीप की मदद से ११.५ मैट्रिक टन कचरा साफ किया। जूते, चप्पल, सैंडल, प्लास्टिक बॉटल की भरमार थी।
जल संसाधन विभाग से १६ अभियंता निलंबित; बिहार
बिहार में पिछले १५ दिनों में १० पुल गिर जाने के बाद सरकार हरकत में आ गई है।जल संसाधन विभाग में तैनात १६ इंजीनियर्स को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बिहार राज्य के विकास सचिव चैतन्य प्रसाद ने कहा है कि पुल निर्माण करनेवाले कॉन्ट्रैक्टर को छोड़ नहीं जाएगा, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा, जांच जारी है।
हाथरस सत्संग कांड में मुख्य आरोपी मधुकर समेत ६ को किया गिरफ्तार
कल यूपी पुलिस ने मुख्य आरोपी के रूप में देव प्रसाद मधुकर को गिरफ्तार किया है। मधुकर मुख्य सेवादार है जिसकी लापरवाही के चलते १२१ भक्तों की जान सूरज पाल उर्फ भोलेबाबा के सत्संग के बाद चली गई थी।
अन्य ६ को एक दिन पहले अरेस्ट किया गया जो सत्संग आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य हैं। मधुकर की गिरफ्तराय से संबंधित सूचना देने के लिए पुलिस ने १ लाख का इनाम भी रख दिया था। सत्संग समाप्ति के बाद भगदड़ के तुरंत बाद भोले बाबा वहां से गायब हो गए थे।उनके मोबाइल पर आयोजक समिति के लोगों ने २० बार फोन किया और समयानुसार स्थिति की जानकारी दे रहे। ये २० काल बाबा को पांच अलग अलग नंबरों से आए थे। जांच समितियों को शक है कि बाबा ने ही इन ऑर्गनाइजर्स को भूमिगत होने के लिए कहा होगा। यह सभी पांच नंबर स्विच ऑफ हो गए थे।
यह भी सामने आ रहा है कि पीड़ित मदद के लिए चिल्ला रहे थे तब आयोजक समूह उन्हें बाबा का नाम जपने की सलाह दे रहा था जिससे समस्या खत्म हो जाएगी।
मधुकर ने बाबा को मंगलवार २:४८ पर फोन कर भगदड़ से संबंधित जानकारी दी। बाबा मैनपुरी स्थित अपने व्हाइट हाउस में थे जहां दोपहर ३ बजे से ४.३५ तक उसने अन्य आयोजन कर्ताओं से फोन पर बात की थी।
महाराष्ट्र सदन में अवैध परीक्षाओं की जांच के लिए पेश किया बिल
विधान भवन में एक ऐसा बिल पेश किया गया है जो परीक्षाओं से संबंधित अमान्य परिस्थितियों , काम को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाएगी और जमानत नहीं होगी।
यदि कोई एजेंसी परीक्षा का आयोजन करती है और परीक्षा में गड़बड़ हुई तक एजेंसी पर १ करोड़ का जुर्माना लगाया जाएगा। परीक्षा में हुए खर्च को भी एजेंसी से वसूला जाएगा। इसके अलावा अगले ४ वर्ष तक वह एजेंसी कोई अन्य परीक्षा का संचालन नहीं कर सकेगी।
यदि परीक्षा की गड़बड़ी में हुई जांच से पता चला कि जो व्यक्ति दोषी है, उसे कम से कम तीन साल की जेल होगी और अधिकतम १० साल के लिए जेल भेजा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त २ करोड़ तक का जुर्माना भी लग सकता है।
यदि किसी व्यक्ति की परीक्षा संबंधी किसी गड़बड़ी में कोई लिप्तता नहीं पाई जाती और उसने सभी नियमो का पालन उचित तरीके से किया और उसकी जानकारी के बिना अनियमितता हुई है तो उसके खिलाफ एक्शन नहीं लिया जाएगा।
यदि यह अपराध संगठित अपराध की श्रेणी में आया तो संचालकों, अन्य जो पाए गए उन्हें तीन से पांच साल की जेल, १ करोड़ तक जुर्माना, संपत्ति जब्त करने, परीक्षा आयोजन का पूरा शुल्क वसूलने जैसे दंड दिए जाएंगे।
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