महाराष्ट्र के बहु चर्चित नेता कृपाशंकर सिंह अब जौनपुर ,यूपी से बनेंगे सांसद? क्या राह होगी आसान?
उत्तर भारतीय राजनेताओं में महाराष्ट्र के मुंबई से कई नेता रहे हैं। राजहंस सिंह, राम निवास सिंह, उदय प्रताप सिंह , संजय उपाध्याय, संजय निरुपम , सरोज पांडेय, ठाकुर रमेश सिंह , प्रेम शुक्ल, आनंद शुक्ला और यह सूची काफी बड़ी हैं।
इन सबमें प्रमुख नाम रहा है कृपाशंकर सिंह का। पूर्व में कांग्रेस की राज्य सरकार में वह गृहमंत्री रहे हैं। तीन बार कलीना, संताक्रुज से विधायक रहे और कांग्रेस में लंबी पारी चली।यह कहना बिलकुल गलत नही होगा कि कांग्रेस से ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा और देखते ही देखते महाराष्ट्र के गृह मंत्री भी बन गए।
२०१४ से ही केंद्र में भाजपा की सरकार है।महाराष्ट्र में भी २०१४ अक्टूबर से भाजपा एवम अविभाजित शिवसेना की गंठबंधन सरकार रही। २०१९ विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को फडणवीस के नेतृत्व में १०५ सीटें मिली लेकिन उद्धव ठाकरे ने सीएम की कुर्सी के कार्यकाल के बंटवारे को लेकर अपना समर्थन खींच लिया जिसके बाद राज्य में तिपहिया सरकार चली। कोरोना संक्रमण भी फैला और उद्धव ठाकरे को कुछ खास करने का मौका नहीं मिला।इसी बीच शिवसेना में फूट पड़ गई, एकनाथ शिंदे ४० विधायको के साथ अलग हो गए और अब असली शिवसेना के वही प्रमुख बने हुए हैं, भाजपा से साथ आकर सरकार चल रही है।
जम्मू कश्मीर से धारा ३७० समाप्त करने के बाद कांग्रेस ने विरोध जताया तो कृपा भैया भी चुप न रह सके और कांग्रेस का याराना तोड़ दिया। वह किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए पर भाजपा के कुछ कार्यक्रमों में मंच पर दिखाई जरूर दे जाते।
कुछ महीनों के बाद देवेंद्र फडणवीस , चंद्रशेखर बावनकुले जैसे राज्य के शीर्ष नेताओं के बीच कृपा भैया की भाजपा में एंट्री हुई और महाराष्ट्र के दूसरे उपाध्यक्ष बने।पहले उपाध्यक्ष सायन के स्थानीय विधान परिषद सदस्य एवम उद्योजक प्रसाद लाड हैं। इस बीच मोदी जी की अगवानी का मौका मुंबई, नागपुर और वाराणसी में भी मिला। कृपा की नजदीकियां भाजपा के हाई लीडरशिप से बढ़ती गई और २०२४ के लोकसभा चुनाव में उन्हे यूपी के जौनपुर से संसदीय टिकट दिया गया है।
जौनपुर , यूपी के ८० निर्वाचन सीटों में से एक प्रमुख सीट है जहां जनता जनार्दन किसे कुर्सी दे दे यह तय नहीं होता।
वर्तमान में बसपा से श्याम सिंह यादव सांसद हैं और उन्हें ८० हजार से ज्यादा मतों से विजय मिली थी, अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के कृष्ण प्रताप सिंह (के पी सिंह) को ४ लाख २१ हजार वोट मिलने के बावजूद हरा दिया। श्याम यादव को ५ लाख ४० हजार से ज्यादा मत मिले थे।कुल वोटर प्रतिशत ५४ प्रतिशत के लगभग रही और संख्या १०.५० लाख के लगभग रही।
इससे पहले के पी सिंह २०१४ में भाजपा कोटे से सांसद बने थे, भाजपा ने २०१९ में भी उन्ही पर दांव चला लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट को पार्टी नेतृत्व समझ न सका कि सवर्ण के पी से नाराज थे, अपने क्षेत्र में लोगों से यदा कदा ही मिलना उनके हारने का एक और कारण माना गया।
इस बार कभी जौनपुर से २००९ में बसपा से सांसद, फिर बसपा से समर्थित रहे बाहुबली धनंजय सिंह ७ साल के लिए सरकारी ठेकेदार से रंगदारी के मामले में जेल में बंद है। हालांकि उनकी पत्नी भी राजनेता हैं और ठाकुरों का विशेष समर्थन धनंजय सिंह को प्राप्त है, ऐसे में धनंजय का जेल जाना कृपा के लिए शुभ माना जा रहा है।
२०१९ के चुनाव में धनंजय को ६७ हजार के करीब मत मिले थे।
जो धनंजय के प्रति निष्ठावान हैं वह उनके अलावा किसी और को मत दे, यह भावना मुश्किल मानी जा रही है।
जौनपुर में ९ विधानसभा क्षेत्र हैं। जिनमे से चार पर भाजपा जबकि अन्य ५ पर सपा का कब्जा है। मल्हनी उपचुनाव में भाजपा हार गई थी।
बदलापुर से भाजपा के रमेश मिश्र दुबारा चुने गए, जौनपुर से भाजपा के गिरीश यादव को राज्य मंत्री हैं उन्हे फिर जीत मिली। शाहगंज से भाजपा एवम निषाद पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार रमेश सिंह, केराकत व मछलिशहर सपा के पास, मल्हनी से सपा के नेता व दिवंगत सांसद पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव को जीत मिली जबकि भाजपा के के पी सिंह यह उपचुनाव हार गए थे। मड़ियाहूं से भाजपा अपना दल के नेता आर के पटेल जीते जबकि मुंगरा बदशाहपुर से सपा को जीत मिली। जाफराबाद सीट भी भाजपा के हाथ से निकलकर सपा के जगदीश नारायण राय के पास चली गई।
संसदीय निर्वाचन में विधानसभा क्षेत्रों का विशेष महत्व है। भाजपा को अन्य पांच जहां से वह विधानसभा २०२२ का चुनाव हारी हैं, वहां काफी मेहनत करनी होगी।
जौनपुर संसदीय क्षेत्र में लगभग ११ प्रतिशत मुसलमान मतदाता हैं, वहीं २२प्रतिशत वोट शेड्यूल कास्ट से हैं।
पिछली २०१९ चुनाव में भाजपा के के पी सिंह को ४२ प्रतिशत वोट मिले जबकि बसपा के श्याम यादव को ५० प्रतिशत मिले थे। सबसे अधिक वोट भाजपा को जौनपुर(९५ हजार+), मुंगरा बादशाह पुर(९३ हजार+), शाहगंज(८८ हजार+) से मिले थे।
सपा ने यहां से दीपक सैनी को टिकट दिया है। पिछली बार २०१९ में बुआ बबुआ का गठबंधन होने से श्याम सिंह यादव के जीत की राह आसान हो गई थी और अब इस बार क्या सपा इतिहास दोहरा सकेगी यह देखना दिलचस्प होगा।
बसपा के धनंजय सिंह ने २ मार्च को सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों को जौनपुर लोकसभा के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था जिसके ठीक तीन दिन बाद ५ मार्च को एमपी एमएलए कोर्ट ने किडनैपिंग, रंगदारी के मामले गिरफ्तार कर ७ साल की सजा सुना दी।
लखनऊ यूनिवर्सिटी से सवर्ण छात्र नेता के रूप में उभरे धनंजय ने रारी से विधायकी लड़ी, २००९ में बसपा से सांसदी जीती , जिसके बाद मलहनी से पिता राजदेव सिंह को विधायक चुनवाया था। वैसे तो धनंजय पर कई मामले दर्ज हैं लेकिन पहली बार ७ साल की सजा हुई है।
कृपा जौनपुर में हर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों में उपस्थिति लगाना शुरू कर दिए हैं।
सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर वह कांग्रेस में रहने के दौरान अपने विवादित भाषणों के लिए जनता से माफी भी मांग चुके हैं हालांकि वह कह चुके हैं कभी उन्होंने राष्ट्र विरोधी बयान नही दिया, भाजपा में आकर उन्हें दूसरा जन्म मिला है। कांग्रेस में दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की हां में हां मिलाना पड़ता था , स्वैछा से कुछ कह नहीं सकते थे।

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