यदि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री न होते तो राम मंदिर नही बन पाता: मनसे प्रमुख
भले ही अयोध्या में राम मंदिर बनाने का फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने दिया हो पर यदि मोदी प्रधानमंत्री नही होते तो राम मंदिर नही बन सकता था यह भी उतना ही सच है।
यह उद्गार १३ अप्रैल के दिन कार्यकर्ताओं से एवम प्रसार माध्यमों से बातचीत के दौरान मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कही।
राज ठाकरे ने कहा १९९२ से लेकर २०२४ तक राम मंदिर का मुद्दा जन बूझकर रखड़ाया गया। १९९२ में कार सेवकों पर गोलियां बरसाई गई, उनके शव सरयू नदी में बहाए गए। यह सब हमने टीवी पर देखा था। बहुत ही हृदय विदारक दृश्य था। आज राम मंदिर बना है तो मुझे बहुत खुशी है। ऐसा नहीं है कि धर्म के नाम पर हम देश का निर्माण चाहते हैं लेकिन राम मंदिर के निर्माण पर निश्चित रूप से प्रसन्नता है।
राज ठाकरे ने कहा कि कई लोग कह रहे है मैंने ,मनसे पार्टी ने मोदी सरकार को समर्थन क्यों दिया?
मैं बता दूं कि २०१४ से २०१९ तक मोदी सरकार पर जब भी टिप्पणी की, आलोचना की वह मोदी जी की व्यक्तिगत आलोचना नहीं थी , मुद्दों पर थी।
मैं आलोचना करता था तो प्रशंशा भी करता था। चाहे धारा ३७० के हटाए जाने की बात हो, राम मंदिर निर्माण की बात हो, एनआरसी की बात हो ,कई बार स्वतः फोन कर मोदी जी के अच्छे कामों की तारीफ की है।
आज जब देश विकास की रह पर है, एक ओर मोदी जी जैसा कुशल सक्षम नेतृत्व है, दूसरी ओर कमजोर पक्ष तो ऐसे में राष्ट्र हित के लिए भाजपा को समर्थन देना आवश्यक है, मैंने यह सब पार्टी के हित को ध्यान में रखकर भी किया है।
लोकसभा में प्रचार से संबंधित कौन सी कार्यकर्ता, पार्टी के अधिकारियों से संपर्क करना है इसकी सूची भी जल्द ही जारी की जाएगी।महायुति यानी भाजपा, सेना, राकांपा के उम्मीदवार और कार्यकर्ता सीधे हमारे उन प्रचार संबंधित कार्यकर्ताओं से ही संपर्क करें।
हमने भाजपा को समर्थन दिया है जिसके लिए हमने भी अपेक्षाएं रखी हैं।
मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिले।
राज्य में मौजूद गढ़, किलों की सुरक्षा, संवर्धन सुनिश्चित हो।
उच्च शिक्षा के साथ ही युवक युवतियों को बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों ,इसकी रूपरेखा बने और काम हो।
सभी राज्यों को समान अवसर मिले।
जिन लोगों को मेरे फैसले से एतराज है वह अपने तरीके से अपना निर्णय ले सकते हैं।
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