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चुनाव से ठीक पहले गृहमंत्री ने किया CAA लागू/नोटिफिकेशन हुआ जारी/देश भर में खुशी की लहर

भारत सरकार ने आज के दिन को ऐतिहासिक बनाते हुए CAA नागरिकता संशोधन कानून की अधिसूचना जारी कर दी है और अब यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है।

CAA दिसंबर 2019 में  संसद में पास हो गया था।लागू आज किया गया है। राष्ट्रपति द्वारा 6 महीने के अंदर मंजूरी मिलना था, लेकिन इसके बाद देशभर में इसका विरोध भी शुरू हो गया था।दिल्ली के शाहीन बाग में हजारों लोगों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया था।आम जनता को भड़काया गया कि यह नागरिकता छीन लेने वाला कानून है। 
क्या है यह कानून?

हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, सिख समुदाय के लोग जो बांग्लादेश, पाकिस्तान , अफगानिस्तान से भागकर भारत में आए हैं और शरणार्थी बने हुए हैं उन्हें नागरिकता इस कानून के तहत दी जा रही है।
इस कानून के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई और सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार से पूछा कि क्यों श्री लंका जैसे देश को इस में शामिल नहीं किया गया ? इस पर सरकार ने कहा कि कानून उन धर्म के लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया जो एक विशेष धर्म के तहत बने देश में रह रहे हैं, जिन पर  वहां की सरकार जुल्म कर रही है और वे लोग प्रताड़ित हो रहे हैं। ७० साल पुराने व्यवस्था को ध्यान में रखकर कानून बनाया गया है।

आपको बताते चलें कि पहले नागरिकता संशोधन कानून १९५५ में बना था और शरणार्थियों के लिए निर्देश दिया दिया गया कि वह लोग ११ वर्ष तक भारत में शरणार्थी बनकर रहें जिसके बाद विचार किया जाएगा कि क्या उन्हें नागरिकता देनी है।
इसके बाद इस कानून में ९ बार संशोधन हुआ ।
२०१९ में भारत सरकार ने घोषित किया कि जो शरणार्थी ३१ दिसंबर २०१४ से पहले आए हैं उन्हे नागरिकता दी जाएगी।


क्या बताना होगा ?

किस देश से आए ? देश क्यों छोड़ा? यहां कहां कहां अब तक रहे? यहां जीवन व्यापन के लिए क्या व्यवसाय कर रहे हैं?  यह जानकारी ऑनलाइन देनी होगी।

इस नियम के लागू होने से पहले कोविड महामारी ने दस्तक दे दी और यह टाल दिया गया था।जिसके बाद वैक्सीनेशन भी चला। अब जाकर यह कानून लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आखिरकार लागू कर दिया गया है।

पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा समेत कई राज्यों में जहां शरणार्थी रह रहे हैं उनमें खुशी की लहर दौड़ गई है।


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