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कल है शटतिला एकादशी / जानिए महात्म्य

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है।

 कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्ण की विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


इस दिन जो साधक भगवान विष्णु को तिल अर्पित करता है, तिल का दान करता है और स्वयं भी तिल का सेवन करता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. इस वर्ष षटतिला एकादशी का व्रत 6 फरवरी यानी मंगलवार को रखा जाएगा । पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी का त्योहार मनाया जाता है।

एकादशी मुहूर्त
 इस दिन एकादशी तिथि की शुरुआत 5 जनवरी को शाम 5 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और इसकी तिथि का समापन 6 जनवरी को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, षटतिला एकादशी को 6 फरवरी को मनाई जाएगी। 7 फरवरी को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। 
एकादशी व्रत के नियम
साल भर में 24 एकादशी आती हैं। पद्म पुराण में एकादशी के व्रत के बारे में काफी वर्णन किया गया है। पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति साल की 24 एकादशी का व्रत रखता है और वह भोग और मोक्ष का अधिकारी हो जाता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से परम पद को पाता है। पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी व्रत के नियम के अनुसार, एकादशी से एक दिन पहले व्यक्ति को एक समय का भोजन त्यागना होता है। एकादशी के दिन शाम के समय फलहार किया जाता है। अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही उपवास समाप्त होता है। 
व्रत पारायण:
७ फरवरी सुबह ०७:०६ बजे से लेकर सुबह ०९:१८ बजे तक


एकादशी व्रत के प्रभाव से व्यक्ति जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही दरिद्रता भी समाप्त हो जाती है।

( संकलन: आचार्य अजय मिश्र जी, मुख्य पुजारी विहिप संचालित समर्थ हनुमान टेकडी सिद्ध पीठ, सायन ,मुंबई)

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