बुलढाणा अस्पताल के सामने सड़क पर मरीजों के उपचार पर मुंबई हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने का दिया निर्देश/ दस दिन के अंदर हलफनामा दायर करे सरकार: चीफ जस्टिस उपाध्याय
मुंबई उच्च न्यायालय में पिछले वर्ष ही नांदेड़ एवं छत्रपति संभाजी नगर जिले के सरकारी अस्पतालों में हुई इलाज के दौरान मौत पर सुवो मोटो पीआईएल पर पेशी चल रही थी।
इसी पल में एडवोकेट मोहित खन्ना ने बुलढाणा सरकारी अस्पताल के सामने सड़क पर चल रहे मरीजों के उपचार से संबंधित कई न्यूज़ रिपोर्ट भी जज साहब के सामने पेश कर दी।
मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायाधीश आरिफ डॉक्टर की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश जारी कर दिया कि 10 दिनों के अंदर इस पर विस्तृत हालकनामा दायर करके बताएं कि ऐसा क्यों हो रहा है।
खबर यह थी महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में अस्पताल के ठीक सामने ही सड़क पर फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए कुछ मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर बुलढाणा के सरकारी लीडर पी काकड़े का कहना है कि अस्पताल के पास सिर्फ 30 बेड की कैपेसिटी है जबकि 150 लोग एक लोकल मंदिर में मिठाई खाने से फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गया और बीमार पड़ गए थे और वह उपचार देख रहे थे ऐसे में 30 बीट की कैपेसिटी वाला अस्पताल इन लोगों को अस्पताल के अंदर इलाज देने में सक्षम नहीं था।
इस जानकारी के बावजूद कि उनकी कंडीशन अत्यधिक चिंताजनक नहीं थी और अगले ही दिन उन्हें डिस्चार्ज भी कर दिया गया फिर भी न्यायाधीश की बेंच ने यह सवाल खड़े कर दिए की आपातकालीनदेखभाल के लिए पर्याप्त इंतजाम के बारे में सरकार क्या कहना चाहती है और दूसरे जिला अस्पताल की बुलढाणा के अस्पताल से दूरी कितनी है जिस पर काकडे ने जवाब दिया कि यह दूरी लगभग 100 किलोमीटर की है।
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