पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी हुए पंचतत्व में विलीन/ पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई/ दिग्गज राजनेताओं का लगा तांता
मनोहर जोशी शिवसेना से पहले नेता जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे और लोकसभा अध्यक्ष तक की कुर्सी संभाली ,अब हमारे बीच नहीं हैं। कल उनका तड़के तीन बजे हृदयाघात से हिंदुजा अस्पताल में निधन हो गया।
अंतिम संस्कार कल शिवाजी पार्क के शमशान भूमि में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
इस मौके पर महाराष्ट्र के सभी राजनेता की आंखें नम थी, हो भी क्यों न? मनोहर जोशी शख्शियत ही ऐसी थी।
मुंबई में कोचिंग क्लास में टीचर के रूप में की शुरुआत
मनोहर जोशी १९६० के दशक में मुंबई आए और एक कोचिंग क्लास में टीचर के रूप में सेवा देने लगे थे। यहां से शुरू हुआ सफर खुद एक करोड़ों के टेक्निकल एजुकेशन इंस्टीट्यूट के रूप में खड़ा हो गया।
कभी शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को अपनी गाड़ी में मनोहर जोशी उन जगहों पर ले जाते जहां बालासाहेब को राजनीतिक स्पीच देनी होती थी।
शुरुआत के दौर में मनोहर जोशी आर एस एस से जरूर जुड़े रहे लेकिन बालासाहेब की क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित होकर शिवसेना ज्वाइन कर ली और ठाकरे के साथ हो लिए। अक्सर हर जगह साथ नजर आते और शिवसैनिक के रूप में अपनी निष्ठा साबित की।
बने मुंबई के महापौर
पार्टी के प्रति निष्ठा, कुशल वक्ता, लोगों को मिलाकर चलने की रणनीति के तहत बालासाहेब ने मनोहर जोशी को मुंबई का महापौर बना दिया। बाद में वह महाराष्ट्र में विरोधी पक्ष नेता भी रहे जब कांग्रेस की सरकार थी।
बने महाराष्ट्र सीएम
एक दौर वह भी आया जब १९९५ में पहली बार शिवसेना भाजपा की संयुक्त सरकार का भगवा महाराष्ट्र में फहरा। इस सरकार में मनोहर जोशी समेत सभी कैबिनेट मंत्री पहली बार बने थे, किसी को अनुभव नहीं था।
एकनाथ खडसे उस कैबिनेट में भाजपा से वित्तमंत्री थे और इरिगेशन पोर्टफोलियो भी देख रहे थे, के अनुसार भाजपा के मतभेद कई बार होते थे लेकिन यह मनोहर जोशी की कुशल नीति थी ,वह सबकी सुनते थे और साथ लेकर चलते, बात मान कर अमल भी करते।
इस दौरान भाजपा के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन ने बालासाहेब को सुझाया कि लोग कांग्रेस लीडर को सीएम के रूप में देखना चाहते हैं इसलिए किसी मराठा नेता को सीएम की बागडोर देना चाहिए।
बालासाहेब ने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए नारायण राणे को १९९९ में मुख्यमंत्री बनाया।
एक कर्तव्यनिष्ठ सैनिक की तरह मनोहर जोशी ने बिना कुछ शिकायत के सी एम पद से इस्तीफा दिया था।
बने लोकसभा अध्यक्ष
इस कर्तव्य निष्ठा का प्रतिफल उन्हे मिला। तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो जाने के बाद यूनियन कैबिनेट में जोशी को जगह मिली और लोकसभा अध्यक्ष का पद भार संभाला।
हुए राजनीति से दूर
२०१२ में बालासाहेब के देहांत के बाद सक्रिय राजनीति से मनोहर जोशी दूर होने लगे थे। विशेषकर तब जब भाजपा से शिवसेना के संबंध को जोड़े रहने की बात कहने के बाद उनके संबंध बालासाहेब के वैधानिक उत्तराधिकारी और बेटे उद्धव के साथ कमजोर होने लगे थे।
आखिर तक उन्होंने शिवसेना का साथ नही छोड़ा। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य भी फीका पड़ता गया। कुशल रीयल एस्टेट डेवलपर भी रहे। ८६ वर्ष की उम्र में इस कोंकणी ब्राह्मण ने आखिरी सांस ली और देश को अलविदा कह दिया है।
अंतिम विदाई के दौरान मुख्यमंत्री शिंदे, उपमुख्यमंत्री फडणवीस, शिक्षण मंत्री केसरकर , अन्य कैबिनेट मंत्री, राज्यपाल रमेश बैश, राकांपा फाउंडर शरद पवार, शिवसेना UBT के प्रमुख उद्धव ठाकरे; उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे और पुत्र आदित्य ठाकरे , संजय राउत समेत कई दिग्गज शामिल रहे।
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