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मिलिंद के बाद सिद्दीकी ने छोड़ा कांग्रेस; क्या जा सकते है जीशान भी? / अजीत को बांद्रा में जीत का भरोसा

बांद्रा से तीन बार विधायक रहे एवं कांग्रेस राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सरकार में महाराष्ट्र से मंत्री रहे बाबा सिद्दीकी ने आखिरकार गुरुवार को 48 साल पुराने कांग्रेस के संबंध को टाटा बाय-बाय बोल दिया है।

बाबा सिद्दीकी से मिलने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजित पवार एवं कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल मिलने के लिए बांद्रा स्थित कार्यालय पहुंचे जहां पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी व उनके विधायक बेटे जीशान सिद्दीकी ने गर्म जोशी के साथ स्वागत किया।

(कल शाम बांद्रा में बाबा सिद्दीकी ,एनसीपी में शामिल हुए)

पहले भी प्रफुल्ल पटेल बांद्रा की सभा में कह चुके हैं कि जल्द ही हम जीशान को भी अपने साथ ले लेंगे इसकी चिंता लोग ना करें।

आपको बता दे बाबा सिद्दीकी 2014 और 2019 के चुनाव में हार गए थे जहां से वर्तमान में भाजपा के आशीष शेलार  विधायक हैं। बाबा सिद्दीकी महाडा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उन पर 2014 के समय से ही SRA के 500 करोड़ के घोटाले के आरोप है जिस पर जांच एजेंसी ईडी की प्रक्रिया चल रही है ।2018 में प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) ने बाबा सिद्दीकी की लगभग 462 करोड़ की संपत्ति के पेपर सीज किए थे। उससे पहले सिद्दीकी के और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर ईडी सर्च अभियान भी चला चुकी है।
 
ऐसा भी हो सकता है कि ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है और बाबा सिद्दीकी ने एनडीए की सहयोगी पार्टी एनसीपी का दामन थामकर खुद को अगली कार्रवाई से बचा लिया हो।

सिद्दीकी ने कहा कि कुछ राजनेता सिर्फ अपने फायदे के लिए अल्पसंख्यक समुदाय का फायदा उठाते हैं जबकि उनके किसी काम नहीं आते। बिना नाम लिए उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा। सिद्दीकी ने कहा कि वह अपनी पार्टी के भी कहीं वरिष्ठ अधिकारियों से इसीलिए नाराज है ।वह हमेशा सिर्फ अपने ही मन की बात सुनते हैं और यहां वह कहना चाहते हैं कि वह एनसीपी को कभी भी धोखा नहीं देंगे।

एनसीपी के प्रमुख एवम महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी साफ-साफ कह दिया है कि  वह अपनी धर्मनिरपेक्षता यानी सेकुलरिज्म का रुख हमेशा बनाए रखेंगे, भले ही उन्होंने मौजूदा एनडीए सरकार से हाथ मिला लिया हो।

जीशान ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह कहा है कि फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं है कि वह कांग्रेस छोड़ रहे हैं।

कांग्रेस को एक और झटका?
लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को एक और गहरा झटका मुंबई से लगा है।  कुछ दिनों पहले सांसद रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मिलिंद देवड़ा जो कि पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा के पुत्र भी हैं, ने दक्षिण मुंबई से अपनी ख्याति कमाई है और पुराने कांग्रेसी संबंध को समाप्त करते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना को ज्वाइन कर लिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उन्हें आश्वस्त किया है कि वह राज्यसभा रूट से उन्हें सांसद जरूर बनवाएंगे।

कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए जहां एक ओर राहुल गांधी न्याय यात्रा में लगे हुए हैं, वही उन्ही की पार्टी के पुराने नेता साथ छोड़कर पाली बदलते नजर आ रहे है जो कि पार्टी के हित में बिल्कुल नही है।




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