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पत्रकार निखिल वागले की कार पर हमला; आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर किया था सोशल मीडिया पर विवादित ट्वीट

पुणे में आयोजित निर्भय बनो सभा में भाग ले रहे वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले की कार पर जानकारी अनुसार भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया,फ्रंट के कांच तोड़ दिए।

यह मामला कल शुक्रवार को हुआ है ,दांडेकर ब्रिज क्षेत्र के नजदीक राष्ट्र सेवा दल कार्यालय के समीप यह घटना घटी है।
वागले ने पूर्व उप प्रधानमंत्री एवम भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लिखा था, एक दंगाई द्वारा दूसरे दंगाई को यह कॉम्प्लीमेंट दिया गया है।( Bharat Ratna to Advani is a compliment given by one rioter to another)।

(क्षतिग्रस्त हुई पत्रकार निखिल वागले की कार)

विश्राम बाग पोलिस ठाणे में वागले के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी एवम भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करने लिए केस भी दर्ज कराया गया था।

(कार पर नीले रंग की स्याही भी फेंकी गई।)

प्रजातंत्र के लिए लड़ो, अभिव्यक्ति की स्वंत्रता के लिए लड़ो( Fight for democracy, freedom of expression) इस विषय पर आयोजित कार्यक्रम में वागले हिस्सा ले रहे थे जब उन पर यह हमला किया गया।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने वागले की पुणे यात्रा का विरोध भी किया था।कुछ कार्यकर्ता सड़क पर कार को जाने से रोकने का प्रयास भी करते नजर आए।

भाजपा नेता सुनील देवधर ने कहा है कि वागले ने पी एम की छवि को धूमिल किया है, जिससे सार्वजनिक शांति पर असर हुआ है।

घटना के बाद क्या कहा वागले ने ?
घटना के बाद मीडिया बाइट में निखिल वागले ने कहा , 'अब तक मुझ पर ७ बार हमला हो चुका है।मैंने हमलावरों को माफ कर दिया है। हम तब तक लड़ेंगे जब तक जिंदा रहेंगे।मैं एक अहिंसक व्यक्ति हूं। यदि आप मुझे मार देंगे तो और हजारों वागले पैदा होंगे। शरद पवार की कितनी आलोचना होती है लेकिन उन जैसा सभ्य नेता उन्होंने कभी नही देखा।'
हमले के बावजूद निखिल, उनके साथी असीम सरोडे, विश्वंभर चौधरी आयोजित सभा में उपस्थित हुए।

कार पर हमले के बार पोलिस बल ने 24 लोगों को हिरासत में लिया है।

कौन हैं निखिल वागले ?

निखिल वागले ने १९ वर्ष की उम्र से भी पहले मीडिया में कदम रखा, साप्ताहिक दिनांक अखबार ज्वाइन किया। बाद में प्रबंध संपादक बने और फिर मुख्य संपादक बने।
 पुणे जाकर किरलोसकर समूह के अखबार को ज्वाइन किया  लेकिन महीने भर बाद मुंबई वापस आकर महानगर अखबार  हिंदी, मराठी दोनो में शुरू किया।

शिवसेना के प्रमुख आलोचक रहे और जिसके लिए वागले के कार्यालय पर शिवसेना की ओर से हमले भी हुए। (१९९१ के दौरान) वागले ने अक्षर, चंदेरी, शतकार जैसे पत्रिकाएं भी निकाली। अपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े मृतक विधायक को  ने विधायको द्वारा श्रद्धांजलि देने के विरोध में वागले को सार्वजनिक माफी के लिए कहा गया पर वागले नही माने तो एक सप्ताह जेल भी जाना पड़ा था। वाकया १९९४ का है।

एक दौर वह भी आया जब तत्कालीन शिवसेना नेता नारायण राणे ( बाद में कांग्रेस का दामन थामा और अब वर्तमान में भाजपा कोटे से केंद्रीय मंत्री हैं) की कटु आलोचना के चलते निखिल को शिवसैनिको ने पीटा भी और चेहरे को इंजन ऑयल से काला भी कर दिया था। यह मामला २००४ का है।

दूरदर्शन राष्ट्रीय चैनल में एंकर भी रहे हैं और आमने सामने शो का संचालन भी वागले ने किया।
२०००  में उन्होंने नेटवर्क १८ ज्वाइन किया और आईबीएन लोकमत मराठी चैनल के संपादक भी बने।
आज चा सवाल शो भी किया , जुलाई २०१४ में लोकमत से इस्तीफा दे दिया।

महाराष्ट्र १ न्यूज चैनल के संपादक बने और २०१६ में इस्तीफा दे दिया था।











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