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आज है पुत्रदा एकादशी/ जानिए महात्म्य

आज है पुत्रदा एकादशी।

 दिनांक 21 जनवरी 2024
भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व समझते हुए कहते हैं कि राजन इसका नाम पुत्रदा है। यह सब पापों को हरने वाली उत्तम तिथि है। समस्त कामनाओं और सिद्धियों के दाता भगवान नारायण पुत्रदा एकादशी के अधिदेवता हैं। चराचर प्राणियों सहित समस्त त्रिलोकी में इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है। जो मनुष्य एकाग्रचित होकर 'पुत्रदा' का व्रत करते हैं, वे इस लोक में उत्तम पुत्र पाकर मृत्यु के पश्चात स्वर्गगामी होते हैं। पुत्रदा एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने और सुनने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन कुछ उपाय करने से आपके संतान से जुड़ी हुई परेशानियां दूर होती हैं,जीवन में सुख-सम्पत्ति आती है।


संतान प्राप्ति के लिए
पुत्रदा एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्न्नान आदि करके उपवास का संकल्प लें और विधि पूर्वक भगवान चक्रधारी विष्णुजी की पूजा करें। योग्य संतान की प्राप्ति के लिए दम्पत्ति इस दिन तुलसी की माला से 'ओम् देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः' मंत्र का कम से कम 5 माला जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि संतान गोपाल मंत्र संतान प्राप्ति के लिए बहुत लाभकारी है। इस दिन लड्डू गोपाल का पूजन जरूर करना चाहिए। लड्डू गोपाल को इस दिन पंचामृत से स्नान कराएं। इससे संतान के जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर होती हैं।

शीघ्र विवाह के लिए
एकादशी के दिन श्रीविष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पाठ को करने से घर में धन-धान्य, सुख-संपदा बनी रहती है। जिन लोगों के विवाह में बार-बार बाधा आ रही हो उन लोगों को इसका पाठ जरूर करना चाहिए। ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि दांपत्य जीवन ठीक नहीं चल रहा है। आपस में लड़ाई-क्लेश बहुत होते हैं तो लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति स्थापना करने के बाद इसका पाठ करे और लाभ होगा।

नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए
पुत्रदा एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और परिवार में खुशहाली आती है। मान्यता है इस दिन विष्णुजी के निमित्त पाठ और जप करने से सुख-शांति के साथ ही सफलता भी मिलती है। जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए
पीला रंग और चन्दन भगवान विष्णु की पूजा में विशेष महत्व रखता है। पीले फूल, पीले फल, पीले वस्त्र विष्णु जी को बहुत प्रिय हैं। इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के फूलों की माला अर्पित करें। इतना ही नहीं, श्री हरि को चंदन का तिलक मस्तक पर लगाएं, इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके बाद स्वयं अपने मस्तक पर लगाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। नारायण को पीला कमल चढ़ाने मोक्ष की प्राप्ति होती है।
( संकलन: आचार्य अजय मिश्र जी, मुख्य पुजारी विहिप संचालित समर्थ हनुमान टेकडी सिद्ध पीठ, सायन, मुंबई)

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