0 ५४ लाख लोगों को कुनबी सर्टिफिकेट दो, नही तो शिवाजी पार्क में होगा धरना: मनोज जरंगे पाटिल ,मराठा लीडर - Khabre Mumbai

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५४ लाख लोगों को कुनबी सर्टिफिकेट दो, नही तो शिवाजी पार्क में होगा धरना: मनोज जरंगे पाटिल ,मराठा लीडर

प्रहार जनशक्ती पार्टी के विधायक बच्चू कडू की मुलाकात मनोज जारंगे पाटिल, मराठा समुदाय के नेता से हुई। पाटिल को यह आश्वासन दिया गया कि महाराष्ट्र सरकार मराठा समाज के लोगों को कुनबी सर्टिफिकेट देने के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए नियम के मुताबिक उन सभी को एप्लीकेशन देना होगा। बच्चू कडू की पाटिल से मुलाकात भी कोई असर नही दिखा पा रही है।

 मनोज जारंगे पाटिल का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार इन सभी ५४ लाख लोगों से संपर्क करें और सर्टिफिकेट जारी करने के लिए एप्लीकेशन ले और दो दिनों के अंदर उन्हें कुनबी का प्रमाण पत्र जारी करें । पार्टी ने पहले ही कह दिया है कि कोई भी व्यक्ति जिसे कुनबी प्रमाण पत्र दिया गया है, उसके सभी रिश्तेदारों को भी कुनबी प्रमाण पत्र दिया देना होगा।

महाराष्ट्र सरकार एक तरफ मराठा मोर्चा को मुंबई पहुंचने से रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है वहीं दूसरी ओर मनोज जरंगे पाटिल दादर के शिवाजी पार्क में लाखों मराठा सहित आकर अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की धमकी दे रहे हैं । इस बीच कल गुरुवार के दिन महाराष्ट्र सरकार की तरफ से प्रतिनिधि मंडल पाटिल से दो बार मुलाकात कर चुका है, उन्हें निवेदन दे चुका है कि वह अपना मोर्चा समाप्त कर दें और जालना से मुंबई ना आएं लेकिन पाटिल पीछे हटने के मूड में दिखाई नहीं दे रहे हैं।

शासन अधिकारियों के अनुसार पाटिल की मांग को तब तक पूरा नहीं किया जा सकता जब तक कि किसी भी समाज का व्यक्ति चाहे वह शेड्यूल कास्ट में हो या ओबीसी कास्ट में हो जब तक कास्ट सर्टिफिकेट के लिए निवेदन नहीं करता।

सरकार ऐसे लोगों को तब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकती जब तक उसने इसके लिए निवेदन न किया हो।
ओबीसी समाज बहुत ही करीब से मराठा समाज के कुनबी  प्रमाण पत्र वाले मामले को देख रहा है और तैयारी भी कर रहा है कि जल्द ही उनका भी मोर्चा निकल जाए।

 ओबीसी समाज के लोग 27 जनवरी को आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने भी यह महाराष्ट्र सरकार को धमकी दे दी है कि यदि ओबीसी समाज सड़कों पर आंदोलन के लिए उतरा तो सरकार के लिए उन्हें नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। देखने वाली बात यह है कि ओबीसी समाज महाराष्ट्र शासन में मराठा समाज के द्वारा हो रहे इस दबाव को लेकर चिंतित है।

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