0 मुंब्रा का अस्पताल अभी भी निर्माणाधीन/ १० करोड़ की निधी २००८ में मिली , अब खर्च बढ़ाकर हुआ १२२ करोड़/ मामला मुंबई हाई कोर्ट में / ठाणे मनपा को जवाब देना पड़ रहा भारी - Khabre Mumbai

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मुंब्रा का अस्पताल अभी भी निर्माणाधीन/ १० करोड़ की निधी २००८ में मिली , अब खर्च बढ़ाकर हुआ १२२ करोड़/ मामला मुंबई हाई कोर्ट में / ठाणे मनपा को जवाब देना पड़ रहा भारी

मुंब्रा उपनगर स्थित कौसा क्षेत्र में 100 बेड का एक अस्पताल बनाने के लिए 2008 में 10 करोड रुपए की मंजूरी दी गई थी। इस मंजूरी के 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी अस्पताल को बनाने का काम पूरा नहीं हो सका है। इसी विषय पर मुंबई हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही थी।
           (मुंबई उच्च न्यायालय)

 केस एसोसिएशन फॉर प्रोटक्शन आफ सिविल राइट्स नमक स्वयं सेवी संस्था ने दाखिल किया है। मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्याय मूर्ति आरिफ डॉक्टर इनकी कोर्ट  में सुनवाई हुई।

 मुंब्रा कौसा क्षेत्र की जनसंख्या अधिक होने के चलते वहां सिर्फ एक ही सार्वजनिक आरोग्य केंद्र मौजूद है जो पर्याप्त नहीं है। कलवा में एक अस्पताल है जहां पहुंचने के लिए 1 घंटे से अधिक का वक्त लगता है जिसके चलते वहां तुरंत उपचार करवा पाना क्रिटिकल मरीजों के लिए प्राण घातक होता है,  ऐसी जानकारी भी इस याचिका में दिखाई गई है।

           (ठाणे मनपा कार्यालय, ठाणे)

 मुंबई उच्च न्यायालय के सामने ठाणे मनपा ने स्वीकार किया कि कलवा क्षेत्र में नागरिकों के लिए स्वास्थ्य की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है । 

अब उच्च न्यायालय को इस बात पर आश्चर्य है कि जब ठाणे मनपा इस बात को जानती है उसके बाद भी यह अस्पताल बनाने में 14 साल का समय निकल जाने के बावजूद पूरा क्यों नहीं हो पाया?  इतना विलंब किस कारण हुआ है? 

क्या कुछ हुआ १४ सालों में 

२००८ में ठाणे मनपा ने १०० बेड का अस्पताल मुंब्रा में बनाने के लिए ४१८०० स्क्वायर फीट का जगह आरक्षित की थी।२०१४ में वर्क ऑर्डर भी जारी किया गया जिसमे दिए शर्त के अनुसार २४ महीनो यानी २ वर्ष में अस्पताल बनकर तैयार हो जाना था। अब १४ वर्ष बीत जाने पर भी अस्पताल नही बन सका है और मनपा ने इस अस्पताल में शवा गार, ऑपरेशन थिएटर, कैंटीन बनाने का भी निर्णय लिया। प्रस्तावित खर्च १२२ करोड़ तक पहुंच गया है।

 मुंबई उच्च न्यायालय ने विलंब की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए और वस्तु स्थिति को समझने के लिए तीन लोगों की एक टीम का गठन कर दिया है। जिसमें जे  जे अस्पताल के डॉक्टर,  सार्वजनिक बांध काम विभाग के अभियंता और एडवोकेट मिनाज काकालिया का समावेश किया है।  8 नवंबर तक इस समिति द्वारा इस पर अपना रिपोर्ट सौंपने का निर्देश मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है।

ठाणे मनपा को लगी फटकार 

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा राज्य घटना की धारा 21 के अंतर्गत हर नागरिक को व्यवस्थित और सुलभ स्वास्थ्य सेवा मिलने का अधिकार है और यह अधिकार नकारा नहीं जा सकता। इस मामले में ठाणे महानगर पालिका की उदासीनता दिखाई दे रही है।

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