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सर में दो गोली, खून से लथपथ गला! चश्मे के कवर ने सुलझाई उरन पुलिस की मर्डर मिस्ट्री/ सास और पत्नी की हत्या करनेवाला पुलिस की गिरफ्त में

१० जुलाई की शाम , 
उरन पोलिस नवी मुंबई को कंट्रोल रूम में फोन आता है। पीरकोन सर्देगांव रोड के पास एक महिला की लाश है।

आनन फानन में पुलिस वहां पहुंचती है। ५३ वर्षीया महिला के सर में दो गोली लगी है, गले को चाकू से घाव देकर काटा गया है। खून से लथपथ बॉडी ..पहचान का कोई सुराग नहीं।
पोलिस ने स्पॉट के आसपास निरीक्षण किया तो एक चश्मा रखनेवाला डब्बा हाथ लगता है। इस डब्बे पर डोंबिवली के चश्मे के दुकान का पता लिखा हुआ था।

पोलिस वहां पहुंच जाती है।दुकानदार मृत महिला की फोटो देखकर पहचान लेता है कि वह तो उसकी ग्राहक है। ५३ वर्षीया भारती अंबोकर जो पलावा, डोंबिवली पूर्व में रहती है।

(भारती अंबोकर, प्रीति मयूरेश गंभीर)

पुलिस पलावा पहुंचती है और पड़ोसियों से पूछताछ करती है।  पुलिस को पता चलता है कि भारती ने बताया कि १० जुलाई को वह अपनी बेटी प्रीती से मिलने अलीबाग जा रही है, उसका दामाद मयूरेश अजीत गंभीर ,४५ वर्षीय उसे लेने आ रहा है। 
भारती की बेटी प्रीती शादी के बाद पोयनाड, अलीबाग में रहती थी।
भारती के कॉल रिकॉर्ड से यह साबित भी हुआ कि अंतिम कुछ फोन कॉल में  मयूरेश का भी कॉल था।
पुलिस को शक हुआ कि मामले में कुछ और लोग भी जरूर शामिल हैं, मयूरेश पर शक की सुई घूम रही थी।
तलाश अभियान शुरू हुआ और मयूरेश गंभीर सहित चार लोगों को डोंबिवली के पलावा से गिरफ्तार किया गया।

मयूरेश ने कड़ी पूछताछ में जो बताया वह चौंकानेवाली है।
मयूरेश ने कह दिया कि वह अपनी सास से तंग आ चुका था। वह बार बार बेटी प्रीती से मिलने की जिद कर रही थी। मैने समझाया भी कि वह गर्भवती है और अलीबाग से यहां डोंबिवली इस हालत में नहीं आ सकती।फिर भी जिद जारी रखी कि उसे ही मैं अलीबाग लेके जाऊं।
इसीलिए मैंने रास्ते में उसे गोली चलाकर मार दिया। चाकू से भी हमला मैने ही किया।

पुलिस ने पूछ लिया कि प्रीति से मिलने की बात से वह इतना परेशान क्यों था? 
काफी समय तक टाल मटोल के बाद आखिर मयूरेश ने कबूल किया कि प्रीति को वह अगस्त २०२२ में ही मार चुका था।
दरअसल मयूरेश एक पूर्व आर्मी मैन है। २०१४ में एक हत्या के मामले में उसे सजा मिली थी लेकिन  २०२२ जुलाई में उसे अदालत ने बरी कर दिया था।
जेल जाने से पहले मयूरेश ने प्रीति को ९ लाख रुपए दिए थे। प्रीति उसकी दूसरी पत्नी थी।
२०२२ जुलाई में जेल से छूटने के बाद उसने प्रीति से उन ९ लाख रुपयों की मांग की तो प्रीति ने साफ मना कर दिया। 
मयूरेश ने प्लान के तहत अलीबाग में ही एक लॉज में ले जाकर प्रीति का गला घोटकर उसे मार डाला और बॉडी ठिकाने लगा दी थी। इसकी जानकारी किसी को नही हुई।
यहां सास भारती अंबोकर से छुपाता रहा कि वह प्रेगनेंट है। मां भारती ने काफी महीनो से बेटी की कोई खबर न होने से बेचैन थी और मिलने की जिद करती रही।  मयूरेश १० जुलाई २०२३ के दिन पलावा आया और अपने तीन दोस्तों के साथ ही अपनी सास को भी कार में बिठाकर अलीबाग के लिए निकल पड़ा। उरन तालुका में सर्देगाँव के पास उसने भारती को सर में गोली मार दी। पहचान न  हो सके इसलिए गला भी काटा। शरीर पर कोई आभूषण मौजूद नहीं रहे इसका भी ध्यान रखा गया। प्रीति की मौत का राज खुल जाने के डर से मयूरेश ने उरन के पास ही सड़क के किनारे डार्क साइड में भारती को मारकर उसे ठिकाने लगा दिया।

यदि वह चश्मे का डब्बा स्पॉट के पास न मिलता तो पुलिस के लिए यह केस सॉल्व करना बहुत ही मुश्किल था। मयूरेश और उसके तीनों दोस्तो को अंदाज भी नही था एक चश्मे का कवर उन्हे जेल पहुंचा सकता है।
मयूरेश के खिलाफ अलीबाग में भी प्रीति की हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।




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