केंद्र सरकार v/s सर्वोच्च न्यायालय : परिवर्तित हुए दलितों के आरक्षण कोटे से संबंधित रंगनाथ मिश्र पैनल की रिपोर्ट नहीं स्वीकारेंगे/
कल तीन सदस्यीय न्यायमूर्तियों के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा कि सरकार पूर्व में न्यायाधीश रहे रंगनाथ मिश्रा समिति की वह रिपोर्ट जिसमे हिंदू दलित इस्लाम या क्रिश्चियन धर्म में परिवर्तित हुए हैं, उन्हे SC कोटा के तहत शैक्षणिक संस्थानों एवम सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए, इसकी बात कही गई है; इसे सरकार नहीं मानती। तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच के समक्ष अपनी बातें रखीं।
केंद्र का कहना है कि यह रंगनाथ रिपोर्ट चार दीवार के भीतर एक कमरे में बैठकर बनाई गई है जिसका सत्य के धरातल से संबंध नही है।
इस संदर्भ में दूसरी समिति का गठन किया गया है जिसके अध्यक्ष पूर्व प्रमुख न्यायाधीश बालाकृष्णन जी हैं और उनकी रिपोर्ट के लिए २ वर्ष का समय निर्धारित किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस पर विचार करेगी कि इस नई समिति के रिपोर्ट का इंतजार करना है या उन पेटिशन पर सुनवाई करनी है जो वर्तमान में लगाई गई हैं।
इस संदर्भ में अगली सुनवाई जनवरी महीने में होगी।
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