यूपी की योगी सरकार पर विपक्ष का हमला, आरक्षण विरोधी है भाजपा/ इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ ने ओबीसी आरक्षण निकाय चुनावों के लिए किया रद्द
(इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ)
दो न्यायमूर्तियों देवेंद्र कुमार उपाध्याय और सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने यह आदेश भी दिया है कि निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के जल्द ही कराए जाएं।
आज इस फैसले के बाद विपक्ष विशेषकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भाजपा पर आक्रामक हो गए हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार आरक्षण विरोधी है, जानबूझकर फैसला रद्द हुआ है। आज ओबीसी का रद्द हुआ है, कल दलितों का आरक्षण रद्द होगा। भाजपा सरकार रही तो बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान में दिए आरक्षण व्यवस्था को जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा। भाजपा हटाओ आरक्षण बचाओ के नारे भी लगे।
दरअसल लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा 5 दिसंबर को जारी किए गए नगर निकाय चुनाव संबंधी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने सरकार द्वारा जारी किए गए 12 दिसंबर के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को भी रद्द कर दिया जिसमे कार्यकाल समाप्त हो रहे निकायों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की बात थी। न्यायालय का यह भी कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी ट्रिपल टेस्ट फार्मूले का अनुपालन नहीं किया और 2017 में हुए रैपिड सर्वे को यह अदालत नही मानेगी।
64 याचिका कर्ताओं ने आरक्षण लागू करने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप राज्य सरकार पर लगाया था।
उधर राज्य के उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि खंडपीठ न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं ,लेकिन कोई न कोई रास्ता निकाला जाएगा और ओबीसी आरक्षण के साथ ही निकाय चुनाव कराए जायेंगे।
क्या है पूरा ओबीसी गणित
यूपी में कुल 403 विधायक सीटों में से अन्य पिछड़ी जाति यानी ओबीसी वर्ग से 90 के लगभग विधायक भाजपा एवम भाजपा समर्थित दलों के पास हैं।
कुल 38% यानी लगभग 151 विधायक हैं जो पिछड़ी जाति यानी ओबीसी/एसटी/ एससी का प्रतिनिधित्व करते हैं। सवर्ण 33% तो वहीं शेड्यूल कास्ट/शेड्यूल ट्राइब के 21%,मुस्लिम समुदाय के 8% विधायक ,विधानसभा में हैं। सपा के पास लगभग 60 विधायक ओबीसी समाज से हैं। सवर्ण से 117 विधायक भाजपा के पास हैं जबकि सपा के पास 11 हैं। भाजपा के पास एससी एसटी से 65 विधायक हैं और सपा के पास इस वर्ग से 20 हैं। मुस्लिम वर्ग के सभी 34 विधायक सपा के पास हैं, यहां इस वर्ग से भाजपा के पास शून्य विधायक हैं।
यदि ऐसे में नगर निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के कराया गया तो समीकरण बदल जाएगा। महापौर की सीट जो ओबीसी के लिए तय मानी जाती है वह सामान्य कोटे में चली जाएगी।
लखनऊ, कानपुर, बनारस, प्रयागराज सभी नगरपालिकाओं में चुनाव होने हैं। छोटी बड़ी कुल मिलाकर 18 पार्टियां हैं। कुल 734 नगरपालिकाएं हैं ,17 नगर निगम हैं , 200 नगर पालिका परिषद हैं और 546 नगर पंचायत हैं। निकाय चुनावों में मेयर पद के प्रत्याशी चुनाव में 40 लाख तक जबकि पार्षद चुनाव के लिए 3 लाख तक खर्च कर सकते हैं।
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