बिना अनुदानित विद्यालयों को ही मिलेगी अब मंजूरी, सरकारी सहायता वाले स्कूल नही खुलेंगे/दीपक केसरकर, सरकारी सहायता वाले स्कूल शिक्षको के वेतन का बोझ सरकार नहीं उठा सकती- देवेंद्र फडणवीस
कल विधानमंडल में शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य रखते हुए शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चौकाने वाले उद्घोष कहे।
केसरकर ने कहा मराठी भाषी लोगों का शिक्षा के पार्टी आकर्षण बढे इसलिए पांचवी से विद्यार्थियों को मातृभाषा में शिक्षा दी जायेगी। इस लिहाज से अंग्रजी भाषा में छपी किताबों का मराठी में अनुवाद शुरू कर दिया गया है। यह महाराष्ट्र के लिए स्वागत योग्य कदम है।
दूसरी ओर केसरकर ने कहा कि स्ववित्त पोषित विद्यालय ही अब शुरू किए जा सकेंगे।
जिन विद्यालयों में शिक्षक वर्षों से पढ़ा रहे हैं उनके लिए 40 से 60% वित्तीय सहायता देने पर विचार किया जायेगा।
फडणवीस ने इस बारे में पक्ष रखते हुए कह दिया कि राज्य के अनुदानित 3900 स्कूलों के लिए 1100करोड़ की राशि बोझ सरकार पर है।
इतना ही नही, जो पेंशन 2005 से बंद हुई है उसे बहाल नही किया जाएगा, क्योंकि इस पर भी 10 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाएगा।
जो शिक्षक 10, 15 वर्षों से पढ़ा रहे हैं उन्हे वेतन कैसे मिलेगा , यह सोचना होगा।
गौरतलब है की केंद्र की नीति और राज्य में हर जगह विज्ञापित सर्व शिक्षा अभियान का क्या होगा।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सर्व शिकू या , पूढ़े जाऊ या को तिलांजलि देने के मूड में राज्य सरकार दिख रही है।
निजी स्कूलों की दुकानदारी को और बढ़ावा मिलेगा, डोनेशन के नाम पर लाखों की वसूली, एक्स्ट्रा एक्टिविटी के नाम पर हजारों की मोटी फीस आम आदमी की जेब से बाहर है, ऐसे में आम मुंबईकर कर्ज लेकर भी बच्चो को पढ़ा लेंगे, कहना मुश्किल है।
मूलभूत आवश्यकताओं में शिक्षा एक महत्वपूर्ण भाग है जो समुचित सामाजिक विकास के लिए जरूरी है। सरकार को इस पर सोचने की आवश्यकता है।
यदि ऐसा होता है तो आर्थिक महानगर मुंबई समेत महाराष्ट्र के पिछड़े गांव के गरीब लोगों के लिए यह बिलकुल सुखद नहीं होगा।
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