अगले २५ वर्ष कर्तव्य पूरा करने का वक्त;भारत लोकतंत्र की जननी; विश्व में अपनी छवि बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी _ संविधान दिवस पर सर्वोच्च न्यायालय में पी एम मोदी का संबोधन
प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉक्टर आंबेडकर थे। 2 वर्ष 11 महीने और १८ दिन का वक्त लगा था संविधान को तैयार करने में ।
जिसे बनाने के लिए विश्व के कई राष्ट्रों के संविधान से कई अनुच्छेद लिए गए थे।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्वोच्च न्यायालय में अपना संबोधन दे रहे थे और इस संबोधन में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ समेत सभी प्रमुख न्यायमूर्ति और न्याय विद अधिवक्ता मौजूद थे ।
इस दिवस के अवसर पर पीएम मोदी ने अपने संबोधन में मुंबई पर हुए 14 वर्ष पहले आज के दिन आतंकी हमले को याद किया। उन सभी जवानों पुलिसकर्मी, आतंकवादी निरोधक दस्ते के वरिष्ठ जांबाज अधिकारियों को याद किया।
नागरिकों की मौत पर शोक जताया और देश के इतिहास में सबसे बड़ा काला दिन भी कहा। मोदी जी ने कहा कि देश में सब संविधान दिवस मना रहे थे उसी वक्त मुंबई में आतंकी हमला आज से ठीक 14 वर्ष पूर्व हुआ था , पुलिस अधिकारियों को भी खोया था। यह हमला मानवता के दुश्मनों ने किया।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज कई चुनौतियों को सामना करने हुए करते हुए आज पूरा देश हमारी और देख रहा है।
हम G 20 जो कि विश्व के 20 शक्तिशाली राष्ट्रों का संगठन है, उसकी अध्यक्षता भी करने जा रहे हैं।
आज भारत की तरफ लोग नजरें गड़ाए हुए हैं। हम देश की सबसे मजबूत पांच अर्थव्यवस्था शक्ति में शामिल हो गए हैं। युवा शक्ति का सबसे बड़ा योगदान देश की विकास में रहा है और आगे भी रहेगा। इन सब का श्रेय हमारे संविधान को जाता है। जीने की समानता, स्वतंत्रता से रहने का अधिकार यह सभी हमारे संविधान की देन है ।
उन्होंने सबसे पहले 3 शब्दों का जिक्र किया, वी द पीपल we the people.
मोदी ने कहा कि यह 3 शब्द हम सभी के लिए विश्वास है ,प्रतिज्ञा है और आमंत्रण है।
उन्होंने कहा संविधान की आत्मा ही देश की आत्मा है। हमारा देश पूरे विश्व के लिए लोकतांत्रिक जननी है।
अपने आप में खुले हुए विचारों की अनुभूति है जो आधुनिक दृष्टिकोण और भविष्य की दृष्टिकोण से ओतप्रोत है।
संविधान की वह नीतियां जिसके हम सभी समर्थक हैं वह गरीब और महिलाओं के विकास के लिए उपयोगी हो रही है। लोकतांत्रिक जननी के रूप में भारत संविधान के आदर्शों को आगे बढ़ा रहा है।
जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में जिस तरह हम जी-20 की अध्यक्षता करने जा रहे हैं यह हम सब की एक संगठन के रूप में सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी छवि अपनी प्रेस्टीज को विश्व के सामने प्रस्तुत करें।
इक्वालिटी एंड एंपावरमेंट इन दोनों का संवैधानिक तात्पर्य समझाने और इसका आशय महत्वपूर्ण तरीके से अवगत कराने की बहुत ज्यादा जरूरत है और खासकर युवा वर्ग को इसे जानने की आवश्यकता है।
भारत के संविधान में जिन तथ्यों को लाया गया जो नीतियां बनाई गई और जिस वक्त बनाई गई 1949 के समय जब इसे स्वीकार किया गया था उस समय और उसके पहले संविधान सभा में किन चीजों पर चर्चा की गई और उस समय वक्त की मांग क्या थी, बातों के बारे में जानना युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत को समृद्ध और विकसित करने में युवाओं का अहम योगदान है।
अमृत काल पर संबोधन देते हुए पीएम ने कहा कि हम आजादी के 75 वर्ष मना रहे हैं और आने वाले 25 वर्षों में विकास की ओर बल देने के लिए कटिबद्ध हो रहे हैं।
अब यह वह समय है कि हम देश के लिए देश के विकास के लिए अपना कर्तव्य निभाए अपनी जिम्मेदारियों को निभाए हमारी जिम्मेदारियां ही हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है।
कर्तव्य पथ पर चलकर के ही देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
संविधान सभा में 15 महिलाओं की सदस्य के रूप में उपस्थिति पर भी अपना वक्तव्य दिया।
उक्त अवसर पर पीएम मोदी ने कोर्ट प्रोजेक्ट का अनावरण किया जिसमें जस्टिस मोबाइल एप, डिजिटल कोर्ट, वर्चुअल जस्टिस क्लॉक, S3wass वेबसाइट शामिल हैं।
इस संबोधन के समय CJI चंद्रचूड़, कानून मंत्री किरण रेजुजू, न्यायमूर्ति संजय कौल, एस अब्दुल नजीर, राज्य प्रभार केंद्रीय कानून न्याय मंत्री प्रो. एस पी बघेल, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल अध्यक्ष विकास सिंह और अन्य न्यायालयीन न्यायमूर्ति उपस्थित रहे।
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