इस बार के अब्दुल ने ली हैवानियत के पार जाकर प्रेमिका की जान, 35 टुकड़े किए, 6 महीने बाद तक पुलिस की गिरफ्त से रहा बाहर , पूरे देश में हैवानियत से भरे हत्या का विरोध जारी/
नाम: श्रद्धा वालकर
उम्र : 26 वर्ष
व्यवसाय: मुंबई के मलाड में कॉल सेंटर में नौकरी
दोस्ती 28 वर्ष के आफताब अमीन पूनावाला से
कहानी फिल्मों की तरह ही है जहां श्रद्धा की आफताब के साथ हुई दोस्ती धीरे-धीरे गहरी हो गई और उसके बाद घरवालों की दहलीज श्रद्धा आसानी से पार कर जाती है। घर वालों की नजर में स्वीकृति नहीं होती क्योंकि आफताब दूसरे धर्म का है। समाज क्या कहेगा? लोग क्या कहेंगे ?सगे संबंधी क्या कहेंगे? इन सब के बारे में बोलकर परिवार ने श्रद्धा को बहुत समझाया पर.... श्रद्धा पर अंध प्रेम का परवान चढ़ गया था।
श्रद्धा और आफताब मुंबई से उत्तराखंड के ऋषिकेश में गए जहां वह कई दिन घूमते रहे। परिवार को पता चला कि श्रद्धा आफताब के साथ ऋषिकेश में घूम रहे हैं तो बहुत नाराज हो गए । पिता ने तो यहां तक कह दिया कि जब तक वह जीवित है श्रद्धा इस घर की दहलीज में अब कदम नहीं रखेगी।
उसके बाद एक और झटका परिवार को तब लगा जब श्रद्धा के सोशल मीडिया अकाउंट से यह पता चला कि वह और आफताब ऋषिकेश से दिल्ली चले गए और लिव इन रिलेशनशिप में वहां रहने लगे हैं।
जिस बात को परिवार दबाना चाहता था की रिश्तेदारों में समाज में किसी को पता ना चले आखिर बात धीरे धीरे सब तक पहुंच गई सामाजिक बदनामी हो रही थी। श्रद्धा के परिवार ने पास पड़ोस के लोगों से भी बातचीत बहुत ही कम कर दिया था ।श्रद्धा सोशल मीडिया पर इंस्टाग्राम पर हमेशा सक्रिय रहती थी । वह आफताब के साथ बसी इस लिव इन रिलेशनशिप की दुनिया में खुश थी। उसने अपने पिता से विरोध के समय पहले ही कह दिया था कि अब वह 25 वर्ष की हो चुकी है उसे समझाने की जरूरत नहीं है। वह अपने फैसले खुद ले सकती है। 8 मई को आफताब और श्रद्धा दिल्ली के महरौली स्थित छतरपुर इलाके में आए 18 मई को यानी ठीक 10 दिन बाद प्रेमी आफताब ने श्रद्धा का कत्ल कर दिया। वजह श्रद्धा शादी का दबाव बना रही थी।
आफताब आफताब लोगों की नजर में श्रद्धा की हत्या को छुपा सके और जीवित रख सके इसलिए श्रद्धा के इंस्टाग्राम अकाउंट से हमेशा पोस्ट डालता रहा। हत्या के बाद उसने इंटरनेट पर काफी सर्च किया। बॉडी को किस तरह के चॉपर से काटा जाता है । डीकंपोज ना हो, बदबू ना आए इसके लिए तरह-तरह के उपाय उसने इंटरनेट पर सर्च किया ।
ठीक अगले ही दिन 19 मई को महरोली के ही तिलक इलेक्ट्रॉनिक्स एक 260 लीटर का एलजी का बड़ा फ्रिज उसने 25000 की कीमत में खरीद लिया। इसके पैसे उसने क्रेडिट कार्ड से दिए थे।
श्रद्धा की डेड बॉडी को उसने 35 टुकड़ों में काटा और फ्रिज में रख दिया। 16 दिनों तक लगातार आफताब रोज रात में निकलता लगभग 2:00 बजे के आसपास और 11 टुकड़े को वह जंगलों में इधर-उधर फेंकता रहा। और इस तरह वह श्रद्धा की बॉडी को ठिकाने लगाने में कामयाब हो गया ।
किसी को कानों कान खबर तक न हुई और धीरे-धीरे 6 महीने गुजर गए । आफताब पुलिस की गिरफ्त से बचा रहा ।
जब परिवार में मां ने श्रद्धा के बारे में जानने के लिए उसकी सहेलियों से बातचीत करती रही तो पता चला कि श्रद्धा ने उन सभी से संबंध तोड़ दिए हैं और किसी से कोई बात नहीं करती तो शक बढ़ने लगा।
नतीजा श्रद्धा के पिता मजबूर होकर दिल्ली के महरौली इलाके में आ पहुंचे जिसका जिक्र सोशल मीडिया अकाउंट पर किया जाता था। वह घर तक पहुंच गए जिसमें श्रद्धा और आफताब लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे जिसके दरवाजे पर ताला लटका देखकर उनका दिल धक से रह गया।
इसके बाद ही श्रद्धा के पिता ने दिल्ली पुलिस के सामने अपनी पूरी जानकारी दी कि कैसे परिवार की मर्जी के खिलाफ नए नवेले मित्र आफताब के साथ अपने प्यार की गाड़ी को आगे बढ़ाया। कैसे दिल्ली जा पहुंची। लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी और अब उस घर में कोई नहीं।
पुलिस का अभियान शुरू हुआ और जो जानकारी पूरे देश के सामने निकल कर आई उसे जानकर लोगों की रूह कांप उठी है। पूरे देश में लोग विरोध प्रदर्शन करने लगे हैं। इस तरह का कत्ल इस तरह की हैवानियत कोई कैसे कर सकता है।
गिरफ्तार कर आफताब को पुलिस 5 दिन की रिमांड में लेकर महरौली के उन जंगलों की खाक छान रही है। जहां 16 रातें अलग-अलग जाकर आफताब ने श्रद्धा के के टुकड़े फेंके थे। 35 टुकड़ों में से अब तक 13 टुकड़े देर रात सोमवार तक पुलिस बरामद कर चुकी है।
आस्था की पुलिस को बयान में बताया है किसने पहली बार हत्या की है वह कोई पेशेवर अपराधी नहीं है। लेकिन पुलिस का यह भी कहना है कि वह बंद आंखों से विश्वास करने के लायक नहीं है क्योंकि जिस तरह से उसने इतनी बड़ी अपराध को अंजाम दिया निश्चित रूप से वह बहुत ही गंभीर क्रिमिनल षड्यंत्र और हैवानियत भरा है ।आफताब ने किसी और की मदद ली थी घटना में और कौन शामिल है इन सब पर भी जानकारी ली रही है।
इस तरह की कई घटनाएं अब तक आ चुकी हैं ।
जहां एक अब्दुल अपनी प्रेमिका को मार देता है। देश के कई इलाकों में प्रेमी प्रेमिका की हत्यावकार देता है, यह हम सभी पढ़ते सुनते रहते हैं। पर यह केस हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए पूरे देश के लोगों के मानवमे विरोध पैदा करता है। लोग हैरान है कि कोई कैसे इंसान इतना हैवान हो सकता है।
आफताब का कहना है उसका अक्सर श्रद्धा से इस बात पर झगड़ा हो जाता था , जब वह किसी और से फोन पर बात कर रहा होता था। श्रद्धा को शक होता था। उसने 18 मई को मारने से पहले भी कुछ दिन पहले श्रद्धा को मारना चाहा था पर वह इमोशनल होने लग गई थी इसलिए आफताब के हाथ रुक गए थे।
आश्चर्य जनक ढंग से आफताब 18 मई को श्रद्धा को मौत के घाट उतारने के बावजूद अब तक पुलिस की गिरफ्त से बचा रहा और एक आम नागरिक की जिंदगी जीता रहा। लेकिन अब वह कानून के हत्थे चढ़ गया है।
शायद बेटी श्रद्धा की खोज खबर लेने यदि उसके पिता दिल्ली न गए होते तो न जाने कब यह घटना सामने आ पाती। आफताब ने कहा है कि श्रद्धा की हत्या में सिर्फ उसका हाथ है ,उसने अकेले सब काम किया है। घटना को अंजाम देने से पहले वह डेक्सटर नाम की अंग्रेजी क्रिमिनल मूवी देखकर आइडिया लिया। उसे अपराध पर आधारित और मूवीस देखना पसंद था। उसके घरवालों, मित्र का इसमें कोई हाथ नहीं, ऐसा आफताब का कहना है।
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