0 गुलाम नबी आजाद ने तोड़ा कांग्रेस से हर रिश्ता- अपनी पार्टी बना सकते हैं; भाजपा में जाने के कयास पर लगा विराम - Khabre Mumbai

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गुलाम नबी आजाद ने तोड़ा कांग्रेस से हर रिश्ता- अपनी पार्टी बना सकते हैं; भाजपा में जाने के कयास पर लगा विराम

पूर्व मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे, भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी , उससे पूर्व इंदिरा गांधी  के समय से लगभग पचास वर्षों की कांग्रेसी पारी खेल चुके गुलाम नबी आजाद ने पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी को इस्तीफा सौंप दिया है।

इस्तीफे से पूरे कांग्रेस के अंदर एक तूफान से आ गया है। गोल्डन जुबली की पारी देश के सबसे पुराने पार्टी के साथ गुजरनेवाले आजाद जम्मू कश्मीर में अच्छा खासा वर्चस्व रखते हैं और यहां से मुख्यमंत्री(२००५-२००८) भी रह चुके हैं। कांग्रेस में रहते हुए भाजपा की नीतियों का विरोध भी किया है। वह फरवरी २०२१ तक राज्यसभा में विरोधी पक्ष नेता के पद और थे। 
सातवीं लोकसभा( १९८०) में महाराष्ट्र के वासीम क्षेत्र से सांसद चुने गए और पहले बार केंद्रीय राजनीति की शुरुआत की थी।

जानकारी के अनुसार हरियाणा के मंत्री ने उन्हें भाजपा में आने का निमंत्रण तक दे दिया था।
पर अब आजाद के विश्वस्त सूत्रों से खबर यह निकल रही है कि आजाद भाजपा में शामिल होने के मूड में नही हैं। आजाद ने कहा कि पिछले 3 वर्षों से विरोधी यह भ्रम फैला रहे है कि वह भाजपा में जानेवाले हैं।
उन्होंने कहा कि वह अपनी अलग पार्टी बनाने की राह पर हैं और जम्मू कश्मीर लौटकर वहां के आवाम की सेवा करना चाहते हैं।

कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए भारत जोड़ो यात्रा पर आजाद ने कहा कि कांग्रेस जोड़ो यात्रा की जरूरत ज्यादा है, पहले वह होना चाहिए।
आजाद का इस्तीफा ऐसे वक्त में आया है जब कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है और कई राज्यों से जनता ने नकार दिया है।
 
आजाद ने अपने पांच पन्ने के इस्तीफे में अपने शुरुआती कांग्रेसी जीवन से लेकर अब तक के सफर को बयां किया है। आजाद ने कहा कि राहुल गांधी के उपाध्यक्ष बनाये जाने के बाद से उनके इर्द गिर्द अनुभवहीन नेताओं का झुंड लगा रहता है और अनुभवी व वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है।

रविन्द्र रैना- भाजपा जम्मू कश्मीर प्रदेश प्रमुख के अनुसार आजाद को कांग्रेस में अपमानित किया जा रहा था। 

पूर्व कांग्रेस सरकार के केंद्र में रहे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष वह होना चाहिए जिसे सभी लोग चुनकर उस पद पर भेजें। अध्यक्ष के रूप में पपेट नही होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कांग्रेस सरकार में कानून मंत्री रहे कपिल सिब्बल ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

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