मँहगा हुआ कर्ज/ रिजर्व बैंक ने फिर बढ़ाई रेपो दर/ रिहायशी घरों की विक्री पर पड़ेगा असर
(रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया - गवर्नर शक्तिकांत दास)
अब रेपो रेट की दर ४.९०% से बढ़कर ५.४०% हो गई है। अन्य दर जैसे मार्जिन स्टैंडिंग फैसिलिटी भी इसी अनुपात में प्रभावित हुए हैं। इस वित्तीय वर्ष में तीसरी बार रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में रेपो दर में बढ़ोतरी हुई है।
(फाइल फोटो- आरबीआई एमपीसी मीटिंग)
अप्रैल 2022 में गृह कर्ज की ब्याज दर ६.४०% थी जो रेपो दर बढ़ने के साथ ही ७.५०% हो गई और अब आधे प्रतिशत की रेपो दर बढ़ने से यह होम लोन रेट भी बढ़ गया है।
अप्रैल में जहां ग्राहक ५० लाख के कर्ज पर ३६ हजार की ईएमआई दे रहे थे वह अब ४४ हजार से अधिक देंगे।
यह रेट अब कोरोना काल के पूर्व के स्तर पर जा पहुंचा है।
रियल एस्टेट के निर्माण में अब बैंकों से लोन की दर और मंहगी होगी।
शक्तिकांत दास, गवर्नर- आरबीआई के अनुसार मुद्रा स्फीति यानी मंहगाई दर को ७% से नीचे रखने के लिए यह कदम जरूरी है। श्री दास का अनुमान है कि अगली तिमाही से मुद्रास्फीति दर में स्थिरता आ जाएगी।
एमपीसी यानी मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी हर दूसरे महीने होती है जिसमे ६ सदस्य होते हैं। बहुमत के आधार पर रेपो रेट ,रिवर्स रेपो रेट में बदलाव किया जाता है।
रेपो रेट वह दर है जिसमे रिजर्व बैंक अन्य सभी बैंकों को कर्ज देता है जबकि रिवर्स रेपो वह दर है जिसमे रिजर्व बैंक अन्य बैंकों से पैसे लेता है यानी डिपाजिट करवाता है और उस पर उन बैंकों को रिवर्स रेपो की दर से ब्याज देता है।
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