जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति चुनाव जीता/ 11 को लेंगे शपथ/ देश के १४ वें उप राष्ट्रपति होंगे धनखड़
आज हुए मतदान और कुछ समय पूर्व ही सम्पन्न हुए चुनावी मत गणना में राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के रूप में भारी बहुमत के साथ देश का 14 वां उपराष्ट्रपति मिल गया है।
आज सुबह १०:०० बजे से ही लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने मिलकर उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना बहुमूल्य मतदान किया। मतदान शाम को ५:०० तक चलता रहा।
सबसे पहले लोकसभा के सदस्य और देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना मत संसद भवन के रूम नंबर ६३ में डाला ।अन्य सभी राज्यसभा के २३७ और लोकसभा के ५४३ सदस्यों द्वारा मतदान किया जाना था। हालांकि पहले से ही श्री धनखड़ की जीत तय मानी जा रही थी क्योंकि भाजपा के पास दोनों सदनों को मिलाकर 394 का आंकड़ा मौजूद था जबकि जीत के लिए 391 मत चाहिए था/
अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के सांसदों को मिलाकर भाजपा समर्थित धन खाते में 510 से अधिक सांसदों का मत जाने का अनुमान था जबकि वाकई चुनावी परिणाम इससे भी बेहतर साबित हुए। विपक्ष (UPA) के उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार श्रीमती मार्गरेट अल्वा को 182 मतों से ही संतुष्ट रहना पड़ा , जबकि इस मुकाबले में जगदीप धनखड़ को ५२८ सांसदों के मत प्राप्त हुए। १५ सांसदों के मत को अमान्य घोषित कर दिया गया।
कौन है जगदीप धनखड़
देश के १४ वें उप राष्ट्रपति के रूप में अपनी नई भूमिका निभाने जा रहे जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं। ७१ वर्षीय जगदीप धनखड़ राजस्थान के जाट समाज का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और जाट समाज का प्रतिष्ठित चेहरा माने जाते हैं। वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का पदभार संभालने से पूर्व ही भाजपा सदस्य बने थे। भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मंत्रिमंडल में संसदीय मामलों के मंत्री भी रह चुके हैं। वह २०१९ से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी से शिक्षाविद रहे धनखड़ प्रसिद्ध वकील भी रहे हैं। राजस्थान के जयपुर से उन्होंने भौतिकी विज्ञान में स्नातक की पदवी हासिल की है। राजस्थान उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता भी रह चुके हैं। १९९०-९१ में राजस्थान के झुंझनु संसदीय क्षेत्र से वह जनता दल की टिकट से सांसद चुने गए थे। राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं।
उपराष्ट्रपति- दूसरा महत्वपूर्ण संवैधानिक पद:
उपराष्ट्रपति के रूप में देश में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद माना जाता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में या किसी कारणवश राष्ट्रपति द्वारा कार्य न कर पाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति ही उनकी जगह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में सारे कार्य करते हैं । उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति के रूप में भी कार्य करते हैं और उन्हें उपराष्ट्रपति के रूप में भले ही कोई मानधन नही मिलता हो पर राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्हें निश्चित वेतन जरूर मिलता है। किसी भी तरह के बिल को लोकसभा से पास किए जाने के बाद राज्यसभा में भी भेजा जाता है और वहां राज्यसभा के सभापति यानी देश के उपराष्ट्रपति के द्वारा प्रस्तावित होने के बाद ही राष्ट्रपति के पास उस बिल को कानून बनाने के लिए भेजा जाता है; इसलिए उपराष्ट्रपति का पद बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के १३ वें उप राष्ट्रपति के रूप में वर्तमान भूमिका निभा रहे एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल १० अगस्त को समाप्त हो रहा है। इसीलिए यह उपराष्ट्रपति का चुनाव आज के दिन कराया गया और 11 अगस्त को शपथ समारोह भी संपन्न किया जाएगा।
आज के चुनाव में लगभग ९३% सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया जबकि ५0 से अधिक सांसदों ने अपने मत का उपयोग नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी समेत कई दिग्गजों ने उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना गुप्त रूप से मतदान संपन्न किया।
समाजवादी पार्टी और शिवसेना के दो सांसदों वही बहुजन समाज पार्टी के एक सांसद ने अपने मत का प्रयोग नहीं किया; टीएमसी के २ सांसदों ने मतदान किया।
कुल मिलाकर ७८० सांसदों को मतदान करना था जबकि ७२५ सांसदों ने मतदान किया जिसमें से १५ सांसदों के मत को अमान्य कर दिया गया। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि राज्यसभा जो कि उच्च सदन है उसमें 8 सांसदों के पद फिलहाल रिक्त हैं। इसलिए दोनों सदनों के कुल सांसदों की संख्या ७८८ के बजाय ७८० सदस्य ही मतदान के लिए पात्र थे।
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