तीरथ सिंह रावत का देर रात इस्तीफा। आज उत्तराखंड -मुख्यमंत्री के लिए भाजपा की बैठक/तीरथ ने दिया चार महीने के कार्यों का ब्यौरा।
उत्तराखंड की राजनीति में चल रहे एक साप्ताहीय युद्ध का कल मुख्यमंत्री तीर्थ सिंह रावत के रात ११ बजे दिये गए इस्तीफे के साथ ही अंत हो गया है।
तीरथ सिंह रावत १० मार्च २०२१ को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हटने पर बतौर मुख्यमंत्री बने थे। चार महीने से भी कम कार्यकाल उनका रहा।
पी एम मोदी के साथ)
रावत को १० सितम्बर तक राज्य के सदन में अपनी सदस्यता दर्ज करानी थी। इनके लिए उप चुनाव कराया जाना जरूरी था, लेकिन चुनाव आयोग ने कोरोना संक्रमण के चलते उप चुनाव कराने से इनकार कर दिया।
इसके बाद राज्य से केंद्र तक मीटिंग का दौर चला। तीरथ सिंह ने दिल्ली दरबार मे हाजिरी लगाई। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा,गृह मंत्री अमित शाह समेत शीर्ष नेताओं से मुलाकात हुई।
गुरुवार शाम को ही रावत को उत्तराखण्ड लौटना था पर उन्हें रोक लिया गया। कल सुबह उनकी फिर से नड्डा से मुलाकात हुई। कल राज्य में वापस लौटने के बाद सचिवालय से प्रेस वार्ता कर रावत ने चार महीने की उनकी मुख्यमंत्री वाले कार्यकाल में किये विकास कार्यों का ब्यौरा दिया, जबकि कयास लगाए जा रहे थे कि वह इस्तीफा देंगे।
रावत ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव की मंजूरी नही मिली है। ऐसे में केंद्र के निर्देश पर हम चल रहे हैं और आगे भी चलेंगे। उनकी दिल्ली में राज्य में होनेवाले अगले चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा हुई है।
गौरतलब हो कि उत्तराखण्ड में २०२२ यानी अगले वर्ष ही चुनाव होने हैं। आज भाजपा की राज्य सदन कमिटी ,अन्य बड़े नेताओं के साथ राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा करेगी। यह मीटिंग अध्यक्ष मदन कौशिक की अगुवाई में होने के आसार हैं।केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की देखरेख में पूरी गतिविधि रहेगी। वह आज राज्य में ही मौजूद रहेंगे।
फिलहाल तीरथ सिंह रावत पौरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य हैं।
देर रात ११ बजे उन्होंने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
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