निर्जला एकादशी पर विशेष- जानें महात्म्य और एकादशी में पुण्य लाभ के लिए किए जानेवाले कार्य
हिन्दू धर्म मे अध्यात्म, ईश्वर और उपासना का विशेष महत्व है। सत्य सनातन संस्कृति में वैदिक धर्मावलम्बियों ने जगतपिता पालनहार भगवान नारायण से जुड़ी एकादशी ,उनके प्रकार व इस दिन किये जाने वाले विशेष धर्मकर्म को अधिक पुण्यदायी एवम मोक्षदायिनी का सुगम मार्ग बताया है। एकादशी हर महीने में कम से कम दो बार आती है। इस प्रकार वर्ष में आनेवाले कई एकादशियों में कुछ एकादशी पर्व को विशेष माना गया है।
कल २१ जून को निर्जला एकादशी है , इसे भी उस विशेष दिन की श्रेणी में रखा गया है।
जानिए क्या है निर्जला एकादशी:-
पूरे साल की एकादशियों का फल मात्र निर्जला एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। मान्यता के अनुसार स्वयं महर्षि वेद व्यास ने महाबली भीम(पांडवों में से एक भाई) को इसका महात्म्य बताया था। इसलिए इसे भीमसेन या पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
महर्षि व्यास ने पांडवों को एकादशी के व्रत से धर्म अर्थ काम और मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया ,तो उस वक़्त भीम बोल पड़े कि आप कह रहे हैं कि एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए। वास्तविकता में मेरे लिए भूखा रहना संभव नही है।मेरे पेट मे वृक नामक अग्नि है, जिसे शांत रखने के लिए मुझे खाना ही पड़ता है। तो क्या मैं एकादशी के व्रत से वंचित रह जाऊँगा।
भीम की इस समस्या पर व्यास जी ने उन्हें निर्जला एकादशी का महत्व बताया कि कैसे उन्हें साल के सभी एकादशियों का फल मिल जाएगा।
इस दिन अन्न जल का त्याग किया जाता है।कथा के दूसरे दिन व्रत का पारण होता है।
निर्जला एकादशी का व्रत पंचांग के अनुसार 21 जून 2021, सोमवार को ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
निर्जला एकादशी का महत्व:-
निर्जला एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण माना गया है। निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है। ये व्रत सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। इस व्रत को विधि पूर्वक करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।दांपत्य जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। इसके साथ ही जॉब, करियर और बिजनेस में आने वाली बाधाएं भी दूर होती है।इस व्रत को रखने से ग्रहों का दोष भी दूर होता है।
निर्जला एकादशी व्रत में जल का त्याग किया जाता है।
निर्जला एकादशी व्रत को कठिन व्रतों से एक माना गया है। इस व्रत में अन्न के साथ जल का भी त्याग किया जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत को पूर्ण किया जाता है। व्रत का पारण द्वादशी के दिन किया जाता है।
इस व्रत में कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:-
निर्जला एकादशी में अनुशासन का पालन करना चाहिए।
काम, क्रोध आदि से दूर रह कर व्रत को पूर्ण करना चाहिए।
अच्छे और सकारात्मक विचारों को अपनाना चाहिए।
अहंकार से दूर रहना चाहिए।
वाणी को खराब नहीं करना चाहिए।
भगवान का स्मरण करना चाहिए।
दान आदि का कार्य करना चाहिए।
भगवान विष्णु की सच्चे मन से उपासना करनी चाहिए।
निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त
निर्जला एकादशी तिथि: 21 जून 2021
(संकलन: आचार्य अजय मिश्र, मुख्य पुजारी: विहिप संचालित समर्थ हनुमान टेकड़ी, सायन- मुम्बई)
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