डीआरडीओ के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ चांदना का दावा - २ डी ऑक्सि डी ग्लूकोज के प्रयोग से कोरोना को जल्द किया जा सकता है परास्त/ अन्य फार्मा कंपनियों को शीघ्र उत्पादन बढ़ाने पर दिया जोर
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ के वरिष्ठ विज्ञानी डॉक्टर सुधीर चांदना ने कहा कि हमारा काम शोध करके उसके फार्मूले को लोगों तक पहुंचाना है जो हमने कर दिया है। अब उत्पादन किससे कराना है कितना ज्यादा बढ़ाना है यह ड्रग रेगुलेटर और फार्मास्यूटिकल कंपनियों के बीच का मामला है। हम अभी भी जनता के बीच कितना अधिक से अधिक उत्पादन बढ़कर के पहुंचे इस पर 12 से 15 घंटे तक प्रतिदिन काम कर रहे हैं।
(डॉक्टर सुधीर चांदना- DRDO)
अभी फिलहाल टू डीऑक्सी डी ग्लूकोज़ यह दवा डॉक्टर रेडी'स लेबोरेटरीज बना रही है। हमने 3 चरणों मे इसका ट्रायल किया है और तीसरे चरण में सबसे ज्यादा सफलता मिली है और करोना को हारते होते हुए हमने देखा है। इस दवा को पानी में घोलकर के मरीज को देने से हमने देखा है कि करोना धीरे-धीरे दम तोड़ देता है । इसलिए अन्य सभी फार्मास्यूटिकल कंपनियों को यह दवा बनाने के लिए पहल करनी चाहिए और अधिक से अधिक मात्रा में इसका उत्पादन शुरू कर दिया जाना चाहिए।
2- डीओक्सि डी ग्लूकोज निर्माण में कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता मौजूद:
डॉ चांदना ने यह भी बताया कि इस दवा के निर्माण के लिए कच्चे माल की भी कोई समस्या नहीं है; जैसा की रेमेडिशिविर या अन्य दवाओं के लिए, वैक्सीन बनाने के लिए जिस तरह की सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसी समस्या इसके लिए नहीं है। पर्याप्त मात्रा में कच्चे माल उपलब्ध हैं और अन्य फार्मा कंपनियों को इसका उत्पादन बढ़ा देना चाहिए।
दवा को ड्रग कंट्रोलर से इस्तेमाल के लिए मिल चुकी है मंजूरी;
आपको बता दें कि २-डी जी दवा को हाल ही में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए ड्रग कंट्रोलर अथॉरिटी ने स्वीकृति प्रदान कर दी थी/ इस दवा को डीआरडीओ के वरिष्ठ विज्ञानी सुधीर चांदना, अनिल मिश्रा, अनंत नारायण भट्ट ने मिलकर तैयार की है। यह दवा पाउडर के रूप में है और पानी में मिलाकर दिया जाता है/ यह दवा कोरोनावायरस ऊर्जा को निष्क्रिय कर उसे खत्म कर देती है।
दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं :
डॉक्टर सुधीर चांदना कहते हैं कि २- डीजी का इस्तेमाल शरीर में किसी तरह के हानिकारक साइड इफेक्ट की संभावना नहीं पैदा करता / 300 से ज्यादा मरीजों पर इसका ट्रायल किए जाने के बाद चांदना ने बताया है कि तीसरे चरण में सबसे ज्यादा सफलता मिली है ।और मरीजों को बचाने में कामयाबी मिली है।
इतना ही नही, जिन मरीजो पर इस दवा का ट्रायल किया गया उनकीं रिकवरी अन्य मरीजो की तुलना में दो से तीन दिन तेज देखी गई। यह दवा सीधे उन कोशिकाओं में पहुंचती है जहां कोरोना अपना संक्रमण फैला रहा होता है। यह दवा मरीजों की ऑक्सिजन पर होनेवाली निर्भरता को भी कम कर देती है। इसे आसानी से पानी में घोलकर मरीज को दिया जा सकता है। डॉक्टरों को अधिक से अधिक मात्रा में दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
जानकारी के अनुसार, डॉ रेड्डीज के अलावा पिरामल फार्मा व कैडिला हेल्थकेयर भी इस दवा के उत्पादन की प्रक्रिया में अपना कदम बढ़ा चुकी हैं।
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