चिरंजीवी रामभक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव आज-जानिए कैसे करें बुद्धि और बल के देवता रुद्रावतार को प्रसन्न/
हनुमान जन्मोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!
भगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र ने वानरराज केसरी और माता अंजना के घर पुत्र रूप में जन्म लिया/
कथा कुछ इस प्रकार की है। माता अंजना १२ वर्षों से जंगल मे रहकर अपने शाप से मुक्त होने और मां बनने की इच्छा रखकर भगवान शिव की पूजा कर रही थीं। भगवान शिव की प्रेरणा से पवन देव ने इच्छा पूरी की।
कथा कुछ इस तरह चलती है कि राजा दशरथ अयोध्या में पुत्र कामेष्टि यज्ञ कर रहे थे, इसी के फलस्वरूप तीनो रानियों को पयासाम (विशिष्ट फल) खिलाया जाना था। इसी फल का एक टुकड़ा एक पतंगा लेकर वहां से उड़ जाता है और यहां जंगल मे माता अंजना के हाथ मे गिरा देता है। माता अंजना उस फल को खा लेती हैं और इस प्रकार पवनपुत्र हनुमान का जन्म होता है।
पवनपुत्र हनुमान पैदा होते ही भूख से रोने लगे।जंगल मे जन्म होने के चलते आस पास कोई फल मौजूद नही था। माता अंजना ने सुबह के सूर्य की ओर देखकर बताया कि वह लाल फल है ,उसे खा लो। महावीर हनुमान ने सूर्य का भक्षण कर लिया। सभी देवताओं ने आकर जब विनती की कि तीनो लोकों में अंधेरा हो जाने से कोहराम मच गया है। सूर्य को न निगलें और उन्हें बाहर निकालें।तब जाकर हनुमान जी ने सूर्य को बाहर निकाला और समस्त संसार पुनः प्रकाशमान हो उठा ।
बाल समय रबि भक्षी लियो, तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सो त्रास भयो जग को ,यह संकट काहू सो जाट न टारो।
देवन आनी करी विनती, तब छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
सभी देवताओं में सबसे जल्द प्रसन्न होने वाले और चिरंजीव भगवान हनुमान की जन्मोत्सव 27 अप्रैल को है पंचांग के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हर वर्ष हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिरों में जाकर बजरंगबली की विधिवत पूजा आराधना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
मान्यता है कि हनुमान जी को सीता माता के निवेदन पर भगवान राम ने आशीर्वाद दे दिया था कि जहां भी राम कथा होगी ,वहां वानर राज हनुमान किसी न किसी रूप में जरूर मौजूद रहेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार हनुमान जन्मोत्सव का योग:
(प्रस्तुति: आचार्य अजय मिश्र; मुख्य पुजारी- समर्थ हनुमान टेकड़ी- सायन, मुम्बई)
जनमोत्सव के दिन शुभ योग का निर्णाण हो रहा है। 27 अप्रैल को सिद्धि और व्यतीपात योग का निर्माण हो रहा है। हनुमान जन्मोत्सव पर सिद्धि योग शाम 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इस योग में हनुमानजी पूजा आराधना करना शुभ रहेगा।
हनुमान जन्मोत्सव 2021 पूजा मुहूर्त:
पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ- 26 अप्रैल 2021 की दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से
पूर्णिमा तिथि का समापन - 27 अप्रैल 2021 की रात्रि 9 बजकर 01 मिनट पर
पूजा विधि:
"ऊँ हनुमते नम:" या अष्टादश मंत्र "ॐ भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा" का जप करने से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से तो मुक्ति मिलती है।
- पूजा में चोला चढ़ाना ,सुगन्धित तेल और सिंदूर चढ़ाने का भी विधान है।
- रामचरित मानस का अखंड पाठ, सुंदरकाण्ड का पाठ, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करें।
पूजा-आराधना के लाभ:
शास्त्रों में कहा गया है कि हनुमानजी आज भी पृथ्वी पर वास करते हैं।
इन्हें जगतजननी माता सीता से चिरंजीवी रहने का आशीर्वाद प्राप्त है।
अजर अमर गुण निधि सुत होहु।
करहु कृपा रघुनायक छोहू।।
(रामचरितमानस- सुंदरकांड:हनुमान - माता जानकी मिलन प्रसंग, अशोक वाटिका)
राम भक्त पवन पुत्र हनुमानजी भगवान सूर्य के शिष्य और भगवान शिव के रुद्र यानी अंशावतार है। इस प्रकार इन्हें महादेव का ११ वाँ अवतार कहा जाता है।जो भी इनकी प्रतिदिन पूजा-आराधना करता है उनको जीवन में संकटों से मुक्ति और सुख शान्ति की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि जैसे ग्रह अशुभ प्रभाव डालते हैं, विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करते हैं तो शनि देव से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। इनकी आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा, मरण आदि से पूर्णतः मुक्ति मिल जाती है।
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