उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में १३५ शिक्षकों की कोरोना की वजह से हुई मृत्यु- राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ/ राज्य सरकार से 50 लाख व एक सरकारी नौकरी की मांग
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव चल रहा है। पंचायत चुनाव का अंतिम चरण कल गुरुवार को है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहयोगी व संलग्न राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्र ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को पत्र लिखकर कहा है कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगाए जाने की वजह से विभिन्न २२ जिलों से १३५ शिक्षा कर्मी व शिक्षक काल के गाल में समा गए हैं।
उन्होंने अपनी मांग रखते हुए पत्र के माध्यम से कहा है कि मृत शिक्षकों के परिजनों को 50 लाख की आर्थिक सहयोग राशि व एक सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए/
हालांकि दावा किए गए आंकड़ों पर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने किसी भी तरह की जानकारी उनके संज्ञान में होने से इनकार किया है। द्विवेदी ने कहा कि कोई भी इलेक्शन दूरी होने के वजह से कोरोना संक्रमित होकर नही मरा है। शैक्षिक महासंघ भले ही यह कह रहा हो, पर बहुत से ऐसे लोग कोरोना से मरे हैं जिनकी कोई ड्यूटी इलेक्शन में नही लगी थी।
महासंघ की मांग पर राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री द्विवेदी ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री जी लेंगे और सभी सरकारी अधिकारियों के लिए समान फैसला लिया जाएगा। सिर्फ शिक्षक ही नही, आंगनवाड़ी के लोग, विभिन्न सरकारी विभाग से जुड़े लोग भी चुनाव की ड्यूटी पर थे।
उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को इस महामारी के बीच पंचायत चुनाव करवाने के लिए आलोचना झेलनी पड़ रही है। यूपी एजुकेशन ऑफिसर असोसिएशन व खंड शिक्षा अधिकारी संघ ने भी सी एम आदित्यनाथ योगी को पत्र लिखा है।
भाजपा के मोहनलाल गंज से सांसद कौशल किशोर के अनुसार उन्होंने चुनाव आयोग को १३ अप्रैल यानी चुनाव के पहले फेज से पहले ही पत्र लिखकर चुनाव नही कराने का निवेदन किया था। उच्च न्यायालय ने भले ही अनुमति दी हो पर आयोग के पास यह दायरा है कि वह चुनाव को टाल सकता है। चुनाव में मतदान के समय सोसल डिस्टनसिंग का पालन कराया जाना संभव नही है। कोई नही कह सकता कि मत देने वाला कौन सा व्यक्ति संक्रमित है और कौन सा व्यक्ति नही है। राज्य में इस तरह संक्रमण के प्रसरित होने के लिए राज्य चुनाव आयोग निश्चित रूप से जिम्मेदार है।
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