भारतवर्ष में होलिका दहन आज- कोरोना रूपी राक्षस का आज होगा दहन। आज की ही शाम से धारा १४४ भी है राज्य में लागू।
होली रंगों का त्योहार है। पूरा भारत वर्ष आज के दिन होलिका महोत्सव मनाने जा रहा है। कोरोना संक्रमण काल में हालांकि किसी भी तरह के सामाजिक धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों को निरस्त किया गया है।
सामाजिक दूरी , फेस मास्क, सैनिटाइजर, अधिक से अधिक जहां तक हो सके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए ही बाहर जाने की बात कही जा रही है ।इन्हीं सबके बीच रंगों का त्योहार होली भी हम सबके सामने है। बीते कुछ हफ़्तो से लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलो के चलते राज्य सरकार ने आज की रात से ही धारा १४४ लगाकर नाइट कर्फ्यू का भी ऐलान कर दिया है।
इन सबके चलते यह बदरंग जरूर हो रहा है लेकिन आपस में प्रेम ,सौहार्द, सद्भावना बनाए रखने के लिए माना जाने वाला यह विशेष पर्व हम सबके बीच खुशी के रंग भरे और जल्द ही आज की होलिका दहन में कोरोना रूपी समाज के दुश्मन वायरस का भी होलिका की अग्नि में जलकर भस्म हो जाए और पूरे विश्व में संपूर्ण मानव जाति को नया जीवन मिले; यही ईश्वर से प्रार्थना करे ।
क्यों किया जाता है होलिका दहन :-
पुराणों के अनुसार मान्यता है कि राक्षस राज हिरण्याक्ष के भाई हिरण्यकश्यप ने घनघोर पूजा कर ब्रह्मा से वरदान लिया था कि इसकी मृत्यु बहुत ही विषम परिस्थिति में होगी। जिसमें मुख्य यह भी था कि न उसे कोई दानव मार सकेगा और ना ही मानव। ना किसी अन्य तरह का पशु या हिंसक जानवर और न ही कोई देवी देवता उसे मार सकेंगे। उसे यह भी वर मिला था कि वह किसी भी प्रकार के शस्त्र या अस्त्र से तथा दिन या रात में नही मारा जा सकेगा। इससे अहंकार में आकर हिरण्यकश्यप ने स्वयम को ही ईश्वर घोषित कर दिया था व उसी की पूजा के लिए लोगों को बाध्य कर दिया था। हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान नारायण को ही मनुष्य और पशु दोनों का एक विचित्र रूप लेना पड़ा था जिन्हें आज हम भगवान नरसिंह के नाम से जानते हैं।
इसी राक्षस राज हिरण्यकश्यप के कुल में भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ था। प्रहलाद शुरू से ही नारायण का भक्त रहा और अपने असुर पिता की बात को न मानता रहा। वह हिरण्यकश्यप को ही समझाता रहा कि भगवान नारायण से ही पूरा विश्व चलायमान है। ब्रह्मांड में सिर्फ नारायण ही सबके स्वामी हैं। इन सब बातों से नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने अंततः नाना प्रकार के कोशिशों के बावजूद बेटे प्रह्लाद को मारने की एक और तरकीब निकाली। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को ब्रम्हदेव से यह वरदान मिला था कि वह अग्नि में कभी नहीं जलेगी और इसी वरदान के अहंकार में होलिका ने प्रहलाद को गोद में उठाया और चारों ओर से अग्नि प्रज्वलित कर दी गई लेकिन नारायण ने स्वयं ब्रह्मा के वरदान को विफल कर दिया।
चूंकि देवताओं का आशीर्वाद हमेशा लोगों के कल्याण के लिए होता है ।लेकिन होलिका ने प्रह्लाद का अनिष्ट व उसे मारने के उद्देश्य से इस वरदान का उपयोग किया इसलिए स्वयं ब्रम्हा भी होलिका से नाराज हो गए और होलिका की रक्षा नही की। देखते ही देखते होलिका पूर्णतः जल उठी पर प्रह्लाद का बाल भी बांका नही हुआ।
तभी से यह प्रथा चली आ रही है कि होली महोत्सव के पूर्व सांध्य पर होलिका जलाई जाती है ।होलिका दहन में विशेषकर हमारे बुरे विचार, दुष्कर्म, समाज मे फैले दुराचार, रोग, पीड़ा सभी का दहन होकर समाज मे शांति, सुख और समृद्धि का विकास हो ऐसी प्रार्थना की जाती है।
होली रंगों का त्योहार है। तरह तरह के अबीर, गुलाल, रंग आदि एक दूसरे को लगाकर लोग गले मिलते हैं।कहा जाता है कि इस दिन एक दूसरे के शत्रु भी आपसी क्लेश को भुलाकर गले मिल जाते हैं।
होली -भारतीय सिनेमा की नजर से
होली का महत्व बॉलीवुड की फिल्मों में भी बहुत चला। फ़िल्म शोले में बुजुर्ग और युवा पीढ़ी के होली मनाए जाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। होली के दिन ..दिल खिल जाते हैं, यह गीत फिल्माया गया। सभी वर्ग के लोगो ने इस गाने को पसंद किया।
बागबान में अमिताभ - हेमा पर फिल्माया गाना- होली खेलें रघुबीरा, अवध में होली खेले रघुबीरा.... भी बहुत ज्यादा चर्चा में रहा और आज भी लोग गुनगुनाते हैं। उत्तर भारत, मध्य प्रदेश, बिहार आदि प्रान्तों में यह गाना लोक गीत के रूप में ख्याति बटोर चुका है।
अमिताभ द्वारा ही एक और फिल्मी गीत रंग बरसे भीगे...चुनरवाली..रंग बरसे ...यह भी होली के दीवानों के बीच बहुत हिट रहा है।
दशकों पहले आई फ़िल्म कटी पतंग में आज न छोड़ेंगे बस हमजोली....खेलेंगे हम होली....राजेश खन्ना व आशा पारेख की युगल जोड़ी पर फिल्माया गया था।
होलिका दहन से जुड़े जरूरी तथ्य-
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। इस साल होलिका दहन के दिन अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योग को बेहद शुभ बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो होलिका दहन शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। भद्रा व राहुकाल के दौरान पूजा-अर्चना करने की मनाही होती है। शुभ योग में होली पूजा करने से जीवन में सुख, शांति के साथ समृद्धि पाने की कामना पूरी होती है।
राशि के अनुसार करें होलिका की पूजा-
मेष और वृश्चिक राशि के लोग गुड़ की आहुति दें।
वृष राशि वाले चीनी की आहुति दें।
मिथुन और कन्या राशि के लोग कपूर की आहुति दें।
कर्क के लोग लोहबान की आहुति दें।
सिंह राशि के लोग गुड़ की आहुति दें।
तुला राशि वाले कपूर की आहुति दें।
धनु और मीन के लोग जौ और चना की आहुति दें।
मकर व कुंभ वाले तिल को होलिका दहन में डालें।
होलिका दहन 2021 का समय-
हिंदू पंचांग के अनुसार, 28 मार्च को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 37 मिनट से रात्रि 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इसके अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाएगी।
(संकलन- आचार्य अजय मिश्र जी, विश्व हिन्दू परिषद संचालित समर्थ हनुमान टेकड़ी:सायन, मुम्बई)
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