पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त सिंह ने लगाया गृहमंत्री देशमुख पर आरोप- १०० करोड़ मासिक हफ्तावसूली का दिया था वज़े को निर्देश- लिखा मुख्यमंत्री को पत्र। लोकमत को दिए साक्षात्कार में देशमुख ने परमबीर के तबादले को बताया था कुछ पुलिकर्मियों की गलती का खामियाजा।
आज मुख्यमंत्री ठाकरे को दिए एक पत्र में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने वर्तमान राज्य गृहमंत्री और राकांपा नेता अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परमबीर ने कहा कि किस तरह पिछले कुछ महीनों में कई बार श्री अनिल देशमुख ने अपने आधिकारिक बंगले ज्ञानेश्वर पर सचिन वज़े को बुलवाया और निर्देशित किया कि उन्हें १०० करोड़ हर महीने मुम्बई से चाहिए। कैसे मिलेगा पूछने ओर देशमुख ने ही संकेत दिए कि मुंबई में १७५० बार हैं जहां से औसतन २-३ लाख महीने के वसूली के हिसाब से ४०-५० करोड़ वहीं से आएंगे। बाकी के ५० करोड़ अन्य स्रोत जैसे हुक्का पारलर से वसूले जाएं।
सचिन वज़े की मनसुख हिरेन की रहस्यमय हत्या मामले और एंटीलिया के पास अलटामॉन्ट रोड पर रखी जिलेटिन वाली विस्फोटक युक्त स्कार्पियो के मामले में गिरफ्तारी हो चुकी है और एन आई ए हर एंगल से मामले की जांच में जुटी है।
परमबीर ने आगे लेटर में जिक्र किया कि कैसे ४ मार्च 2021 को एसीपी पाटिल और बाद में उपायुक्त भुजबल को आधिकरिक बंगले ज्ञानेश्वर पर गृहमंत्री देशमुख ने बुलवाया और बाद में अपने सेक्रेटरी से यह कहलवाया कि गृहमंत्री को 100 करोड़ हर महीने चाहिए।
इस बात को परमबीर सिंह ने लेटर में एसीपी पाटिल से हुई चैट पर बातचीत का भी जिक्र किया है।
दर असल पूर्व कमिश्नर सिंह ने अपने ऊपर गृहमंत्री द्वारा लगे उन आरोपो से नाराज होकर यह खुलासा किया है।
गत दिनों लोकमत को दिए साक्षात्कार में देशमुख ने कहा था कि परमबीर का ट्रांसफर उनके नीचे काम करनेवाले कुछ मुख्य अधिकारियों द्वारा किये ऐसे गलत कामो का परिणाम है जिसे कभी माफ नही किया जा सकता। देशमुख ने यह भी कहा था कि सचिन वाज़े की पुलिस में वापसी होने में उनका कोई हाथ नही था क्योंकि एपीआई जैसे पद के अधिकारी को पुनर्वापसी कराना उनके नियंत्रण या कार्यक्षेत्र में आता ही नही है।
पिछले कुछ महीनों में सचिन वाज़े को गृहमंत्री ने कई बार अपने बंगले पर बुलवाया था। परमबीर ने लिखा है कि उनके अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उन्हें बताए बिना बुलवाना और 100 करोड़ प्रतिमाह वसूलने के निर्देश दिया जाना कितना सही था।
सिंह ने लेटर में दादरा एवम नगर हवेली के सांसद रहे स्वर्गीय मोहन देलकर का जिक्र किया जिनकी मौत होटल सी ग्रीन में 22 फरवरी को हुई थी। मरीन ड्राइव पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट ADR 5/21 दर्ज किया था। जांच में सुसाइड नोट बरामद हुआ जिसमें दादरा नगर हवेली पुलिस द्वारा परेशान किये जाने का उल्लेख था। उचित कार्यवाही की जांच मरीन ड्राइव पुलिस द्वारा की गई थी।
पर इस मामले में गृहमंत्री देशमुख यही चाहते थे कि आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला मुंबई में दर्ज हो जबकि सुसाइड नोट में जिक्र था कि दादरा नगर हवेली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा देलकर को परेशान किया जा रहा था।
लीगल राय लेने और मेरे द्वारा बार बार कहे जाने के बावजूद श्री देशमुख ने एसआईटी का गठन कर दिया था।
पिछले एक वर्ष में कई बार देखा है कि गृहमंत्री अधिकारियों को आधिकारिक बंगले ज्ञानेश्वर में बुलाते हैं और संबंधित मामलों में अपने तरीके से उसमे एक्शन लेने के दबाव बनाते हैं। पुलिस कार्यवाही में इस तरह बार बार राजनीतिक दखल दिया जाना ठीक नही है।
बहरहाल इस खुलासे से महाविकास अघाड़ी सरकार में हड़कंप मचा हुआ है।
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