परमबीर का ट्रांसफर उनके कनिष्ठ अधिकारी की क्षमा न की जा सकनेवाली गलती के कारण हुआ, वज़े को ड्यूटी पर वापस लेना मेरे या मुख्यमंत्री के कार्यक्षेत्र में नही-अनिल देशमुख
महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने चौकानेवाला बयान दिया है कि मुम्बई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का ट्रांसफर उनके ही नीचे काम करनेवाले कुछ जूनियर पुलिस कर्मियों द्वारा की गई गलतियों का परिणाम है।
जैसा कि यह तो ज्ञात ही है कि मुम्बई आयुक्त का ट्रांसफर/ तबादला कोई रूटीन प्रक्रिया के तहत नही हुआ है।
उद्योगपति मुकेश अम्बानी के मुम्बई निवास एंटीलिया हाउस के बाहर कुछ दूरी पर पाई गई जिलेटिन विस्फोटक युक्त स्कार्पियो कार से सम्बंधित मामले में सचिन वाजे की गिरफ्तारी हुई और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एन आई ए एवम महाराष्ट्र एन्टी टेररिज्म स्क्वाड (आतंकवाद निरोधी दस्ता) द्वारा हो रही जाँच में सचिन वाज़े के खिलाफ कई बातें सामने आ रही हैं।एन आई ए सचिन को लेकर मनसुख हिरेन मर्डर से संबंधित स्थान पर ले जाकर सीन दुबारा बना रही है और केस की गहराई तक जा रही है। विस्फोटक वाली गाड़ी मुम्बई पुलिस की अपराध शाखा में तैनात ए पी आई सचिन वज़े ने भी ४ महीने इस्तेमाल की थी, यह भी मान लिया है। इतना ही नही विस्फोटक गाड़ी चलाकर लानेवाला ड्राइवर भी जिस दूसरी गाड़ी से गया वह पुलिस के ही कार्यालय में पाई जाती है। उसका नंबर प्लेट भी फर्जी तरीके से बदल दिया गया। नम्बर प्लेट बदलनेवाले दुकान के मालिक ने भी स्वीकारा कि सचिन वज़े ही नम्बर प्लेट बदलवाने आये थे।
गृहमंत्री ने कहा कि मुम्बई पुलिस के कुछ मुख्य ऑफिसरों ने ऐसी भयंकर गलती की है जिसे माफ नही किया जा सकता। उन्होंने संगीन अपराध किया है।
ऐसे में परमबीर सिंह को पद से इसीलिए हटाया गया ताकि जांच पूर्णतः निष्पक्ष हो दोषियों को कड़ी सजा मिले। यह बातें देशमुख जी ने कल एक टेलीविज़न को दिए साक्षात्कार में कहीं।
अब चूंकि एन आई ए इस जांच को आगे बढ़ा रही है। सत्य सबके सामने आएगा। मनसुख हिरेन जो स्कार्पियो कार के मालिक थे उनकी लाश कलवा खाड़ी में पाई गई थी। उनकी इस रहस्यमयी मौत की गहन जाँच अब एजेंसी कर रही है। एक रिपोर्ट यह भी कह रही है कि पानी मे फेंके जाने से पहले तक मनसुख जीवित थे।
अब एजेंसी इस से संबंधित जांच के लिए हरियाणा लैब भेज रही है।
गौरतलब हो कि मृत्यु से तीन दिन पहले मनसुख हिरेन ने राज्य के मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त, गृहमंत्री को लिखित पत्र दिया और बताया कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।पुलिस बार बार उन्हें बयान देने के लिए कभी सुबह, शाम रात घर से ले जाती है, ऐसा लगता है जैसे कोई अपराध उन्होंने कर दिया हो।मीडिया पर भी उन्होंने परेशान करने की बात कही थी।
सचिन वज़े के नाम से भी मनसुख ने बताया कि वह पहले से मित्र रहे हैं पर फिर भी परेशान किया जा रहा है।
सचिन वज़े १६साल बाद महाविकास अघाड़ी सरकार आने के बाद पिछले वर्ष ही फिर से पद पर नियुक्त किये गए थे।इसके १६ वर्ष पहले उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। सस्पेंड होने के बाद सचिन ने शिवसेना पार्टी की सदस्यता ली और सक्रिय सदस्य भी रहे। उनके ६ विभिन्न कंपनियों से सीधे सम्बंध निकले हैं जिनमे कई राजनेता भी निदेशक हैं।
गृहमंत्री देशमुख ने कहा कि वज़े की नियुक्ति के लिए वह या मुख्यमंत्री किसी भी तरीके से जिम्मेदार नही हैं क्योंकि यह उनके कार्यक्षेत्र में आता ही नही है।
२०११ में बनी डीजिनेक्सट मल्टी मीडिया लिमिटेड बनने के समय अधिकृत पूंजी ५ लाख थी। यह कम्पनी टीवी और रेडियो ट्रांसमिटर , लाइन टेलीफोनी, लाइन टेलग्राफी के उपकरण बनाती है। शिरीष थोरात, आलोक ठक्कर, सुमित महेंद्र राठौड़ इसके अन्य निदेशक हैं। इसका नोंदनीकृत कार्यालय कोर्ट नाका ,ठाणे में स्थित है।
दूसरी कम्पनी मल्टी बिल्ड इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड जनवरी २०१३ में बनी जो कंस्ट्रक्शन व सिविल इंजीनियरिंग में कार्यरत है। कम्पनी के पंजीकरण के समय संजय मशीलकर, उदय पुंडलिक वागले, यश उदय वागले, विजय पंढरी गवई निदेशक रहे हैं। इस कंपनी का कार्यालय भी वही है जो उपरोक्त कम्पनी का है।
टेक लीगल सलूशन प्राइवेट लिमिटेड फरवरी २०१० में बनी जिसके निदेशक पंजीकरण के समय सचिन हिंदूराव वज़े, शिरीष थोरात, मंदार विश्वास जोशी रहे हैं।
(फाइल फोटो: सचिन वज़े)
आश्चर्य यह है कि ये तीनो कम्पनियों में सचिन वज़े निदेशक हैं और ये तब बनी जब वह मुम्बई पुलिस की सेवा से सस्पेंड हो चुके थे।
अब तक यह सुनिश्चित नही हो सका है कि पुलिस बल फिर जॉइन करने के बाद वह बतौर निदेशक काम कर रहे थे या नही।
गृहमंत्री देशमुख के अनुसार ,एपीआई जैसे पोस्ट की फिर से नियुक्ति उनके या मुख्यमंत्री के हाथ मे नही होती है। यह पुलिस आयुक्त व उनकी कमिटी तय करती है।
एंटीलिया स्थित विस्फोटक स्कार्पियो जांच सचिन वज़े को क्यों सौंपी गई? इस पर देशमुख ने कहा कि शुरुआत में अपराध जांच शाखा को जिम्मेदारी दी गई थी और इस यूनिट को वज़े हैंडल कर रहे थे। हालांकि तीन दिन बाद जब हमें लगा कि मामला संगीन है तो हमने तुरंत मामला सहायक पुलिस आयुक्त को दिया।
फडणवीस ने कैसे दिया विश्वसनीय बयान।
गृहमंत्री ने कहा कि दुश्मनी सिर्फ राजनीति तक ही नही सीमित है, यह हर विभाग में होती है। पुलिस महकमे में भी आपस मे रंजिशें होती हैं।इसी आधार पर कुछ पुलिस कर्मियों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक जानकारी मिली होगी।
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