जलसेना का अधिकारी सूरज दुबे पालघर में जिंदा जलाया गया/ चेन्नई हवाईअड्डे से हुए अगुवा, १०लाख फिरौती थी मांगी।
रांची ,झारखंड के मूल निवासी २७ वर्षीय सूरज कुमार दुबे भारतीय जलसेना में कोयम्बटूर के निकट आई एन एस अग्रणी में तैनात थे। छुट्टियां बिताकर वह वापस अपने यूनिट आ रहे थे।
चेन्नई एयरपोर्ट के बाहर गन पॉइंट पर तीन अज्ञात लोगों ने सूरज की गाड़ी से हटाकर उनको व्हाइट एस यू वी में बिठाकर अगुवा कर ले गए। तीन दिन चेन्नई के ही अज्ञात जगह पर रखा।
तीनो बेरहम अपराधियों ने १० लाख की फिरौती मांगी थी। इसके बाद लगभग १४८० किमी की दूरी तय हुई।पालघर के तालसरी तालुका के वेवजी वैजलपाडा गांव लाया गया , और शुक्रवार की सुबह सूरज का सूरज बुझा दिया गया। नेवी अधिकारी सूरज को गन पॉइंट पर डरा धमकाकर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया।
मामले में किसी मानव का नग्न शरीर जलता देख लोकल लोगों ने पुलिस को सूचित किया। पालघर के एस पी दत्तात्रय शिंदे ने कहा कि प्रथमतः जिला सिविल अस्पताल ले जाया गया और बेहतर उपचार के लिए फिर कोलाबा मुम्बई के नेवल अस्पताल अश्विनी हॉस्पिटल ले जाया गया।
अस्पताल प्रशाशन ने कहा कि सूरज कुमार दुबे को ९०% जली अवस्था मे लाया गया जहां उन्होंने असप्ताल मे एडमिशन होते ही दम तोड़ दिया।
किडनेपिंग, रॉबरी, आर्म्स एक्ट्स, हत्या की कोशिश, हत्या करने जैसे कई जुर्म में प्राथमिकी दर्ज कर पालघर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
उप विभागीय अधिकारी धनाजी नालावड़े व टीम बारीकी से जांच कर रहे हैं।सूरज के कॉल रिकार्ड्स, पालघर के वेवजी विलेज, आस पास का जंगली इलाका ,इन जगहों का सी सी टी वी फुटेज खंगालने में पुलिस लगी है। अपराधियों की तलाश जारी है। मामला घोलवाड पुलिस स्टेशन में दर्ज है। धाराओं ३०२, ३६४, ३९२, ३४ के तहत एफआईआर दर्ज हुई है।
आपको बता दें कि पालघर में ही कुछ महीनों पहले संतो की हत्या निर्मम तरीके से हुई थी जिस पर संत समाज आक्रोशित हुआ था।संत समाज आज भी साधुओं की हत्या का मामला सी बी आई जांच में दिये जाने की मांग कर रहा है।
खबरे मुम्बई नजरिया-
हवाई अड्डो, बड़े रेलवे टर्मिनस के आस पास अच्छी खासी पुलिस या अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती होनी चाहिए।
चेन्नई से पालघर लगभग १५०० किमी की दूरी सड़क मार्ग से तय होना और पूरे रास्ते मे किसी भी ट्रैफिक, पुलिस ने चेकिंग की होती तो शायद आज यह खबर नही होती।
पालघर के जंगली इलाके महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा से सटे हैं। यह नक्सली इलाका बन चुका है। महाराष्ट्र सरकार को ऐसे हिंसक जगहों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सरकार को पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए पालघर में विशेष सुरक्षा दलों की तैनाती करनी चाहिए। जब देश को सुरक्षा देनेवाले सूरज कुमार दुबे जैसे अधिकारियों की जान सुरक्षित नही है, जिंदा जला दिया जाता है, वहाँ आम आदमी के जान की क्या कीमत होगी।
अपराधियों को मौत से कम कोई सजा नही होनी चाहिए। मामले को फास्ट ट्रैक में देखा जाना चाहिए।
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