0 भारत की जी डी पी दर ०.४% की रफ्तार से बढ़ी। आर्थिक मंदी से बाहर निकलती अर्थव्यवस्था- इस वर्ष ८% की दर से जी डी पी के घटने का अनुमान। कृषि क्षेत्र ने पूरे लॉक डाउन में दिया सहारा। - Khabre Mumbai

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भारत की जी डी पी दर ०.४% की रफ्तार से बढ़ी। आर्थिक मंदी से बाहर निकलती अर्थव्यवस्था- इस वर्ष ८% की दर से जी डी पी के घटने का अनुमान। कृषि क्षेत्र ने पूरे लॉक डाउन में दिया सहारा।

कल शाम सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के तीसरी तिमाही के आंकड़े जारी किए गए। 
केंद्रीय सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी हुए इस आंकड़े में वृद्धि दर ०.४%  दर्ज की गई जो कि स्वतः में एक सुखद राहत की बात है। गौरतलब हो कि पहली तिमाही अप्रैल से जून की अवधि में अर्थव्यवस्था में  २३.९% तक गिरी थी जो कई सालों की  बेहद बड़ी गिरावट रही। दूसरी तिमाही में सुधार के साथ एकल गिरावट दर ७.५% रही। दूसरी तिमाही जुलाई से सितम्बर में अर्थव्यवस्था में सुधार के कारण लॉक डाउन का धीरे धीरे खुलना, कई क्षेत्रों में लोजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, आदि को गति मिली। 


रिजर्व बैंक ने भी आर्थिक चुनौती से निपटने के लिए कई कदम उठाए। लेनदारों को राहत देने किए लिए मोरेटोरियम, बैंकों को एनपीए खातों को नेशनल कम्पनी ला ट्रिब्यूनल में न ले जाने , कोरोना संक्रमण के चलते आर्थिक विषमता झेल रही कम्पनियों को अधिकतम २ साल तक मोरेटोरियम यानी ब्याज नही लेने की सुविधा देते हुए उनके कर्ज का रिस्ट्रक्चर करने को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया गया।

तीसरी तिमाही ( अक्टूबर- दिसम्बर)  के आंकड़ो में ०.४% की वृद्धि इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार से ही सही पर फिर से लौट रही है। हालांकि संकुचन दर ७.७%  ( नकारात्मक)  के अनुमान से बढ़कर अब ८% से संकुचित होने की अनुमानित बात कही जा रही है। इसका मुख्य कारण निर्माण व सेवा (सर्विसेस)  के क्षेत्र में अनुमान से कम वृद्धि का होना पाया गया है। 

निर्माण क्षेत्र में मजदूरों की समस्या धीरे धीरे हल हो गई और जिसके चलते निर्माण क्षेत्र में गति आई ।यह क्षेत्र ने  इस बार की तिमाही में पिछले वर्ष की इसी तिमाही( अक्टूबर- दिसम्बर २०२०) की तुलना में १.६% की  वृद्धि दिखाई है। निर्माण क्षेत्र पिछली तिमाही में ( जुलाई- सितम्बर वित्तीय वर्ष २०२१) में १.५% की गिरावट में था।
कृषि व्यवसाय ने लॉक डाउन के पूरे समय मे हमेशा विकास दिखाया और जीडीपी को संभालने में आओ ई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तिमाही में भी विकास दर दर्ज कराते हुए ३.९% ग्रोथ दिखाई। पिछली तुम्ही में कृषि का विकास दर ३% था।

आर्थिक व रियल एस्टेट क्षेत्र ने ६.६% वृद्धि इस बार दर्ज की है जबकि इसने इस दूसरी तिमाही में ९.५%की गिरावट दर्ज की थी।

ग्राहकों का विश्वास अब भी कम

ग्रहको के खर्च करने के पैटर्न को देखते हुते उनके विश्व मे कमी देखी गई है। कंज्यूमर्स इसपेन्डिंग में २.४% की गिरावट हुई है। इसके पीछे बड़ी वजह लॉक डाउन के चलते लोगों में बचत की आदत , कई लोगों के असामयिक नौकरियों के छूट जाने  आदि मुख्य हैं। तीसरी तिमाही में दीवाली जैसे पर्व होने के बावजूद ग्राहकों के खरीद की चमक फीकी रही है।



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