0 बसंत पंचमी महोत्सव आज। प्रयाग संगम में आज भी करेंगे हजारो श्रद्धालु स्नान। बुद्धि की अधिष्ठात्री माता सरस्वती के पूजन का है आज विशेष विधान - Khabre Mumbai

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बसंत पंचमी महोत्सव आज। प्रयाग संगम में आज भी करेंगे हजारो श्रद्धालु स्नान। बुद्धि की अधिष्ठात्री माता सरस्वती के पूजन का है आज विशेष विधान

हिंदू धर्म में बसंत पंचमी या वसंत पंचमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के साथ पवित्र नदी में गंगा स्नान का भी महत्व है। 
प्रयागराज के संगम तट पर आज चौथा शाही स्नान पर्व होने के नाते भी बसंत पंचमी का महात्म्य बढ़ जाता है।श्रद्धालुओं द्वारा गंगा ,यमुना के साथ ही अदृश्य रूप में विराजमान माता सरस्वती की भी पूजा अर्चना की जाती है। पिछले वर्ष इसी दिन २० लाख के लगभग श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई थी।

कुल छह शाही स्नान में से एक आज के दिन भी सोशल डिस्टनसिंग के साथ स्नान की व्यवस्था प्रशाशन ने की हुई है। लोगों को कोरोना टेस्ट रिपोर्ट भी लाने के लिए कहा गया है।


मुम्बई के विश्व हिंदू परिषद संचालित समर्थ हनुमान टेकड़ी के मुख्य पुजारी आचार्यश्री अजय मिश्र जी के अनुसार आज वंसत पंचमी के दिन स्नान और पूजा अर्चना का विशेष महत्व है।
 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। जिसमें विवाह, सगाई और निर्माण जैसे शुभ कार्य बिना मुहूर्त के किए जाते हैं।

कहते हैं कि अगर कुंडली में विद्या बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा में बाधा आ रही है तो बसंत पंचमी के दिन पूजा करके उसे ठीक किया जा सकता है। इस साल बसंत पंचमी  आज ही 16 फरवरी 2021 (मंगलवार) को है। 

कहते हैं कि बसंत पंचमी के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानिए-


बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के दौरान इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

बसंत पंचमी के दिन पीले या सफेद वस्त्र पहनने चाहिए। काले या लाल वस्त्र न पहनें। मां सरस्वती की पूजा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुरू करनी चाहिए।

 बसंत पंचमी के दिन पूजा सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे में करनी चाहिए। 

इस दिन पूजा के दौरान मां सरस्वती को पीले या सफेद पुष्प जरूर अर्पित करने चाहिए।
 
प्रसाद में मिसरी, दही व लावा आदि का प्रयोग करना चाहिए। (समर्थ हनुमान टेकड़ी के मुख्य पुजारी श्री अजय मिश्र जी द्वारा वर्णित)


माता सरस्वती की प्रार्थना से जुड़े कुछ प्रचलित मंत्र:
१: 
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।


अर्थ: जो परमेश्वरी भगवती शारदा कुंदपुष्प, चंद्र और बर्फ के हार के समान श्वेत है और श्वेत वस्त्रों से सुशोभित हो रही है जिसके हाथों में वीणा का श्रेष्ठ दंड सुशोभित है।जो श्वेत कमल पर विराजमान है जिसकी स्तुति सदा ब्रह्मा विष्णु और महेश द्वारा की जाती है। वह परमेश्वरी समस्त दुर्मति को दूर करने वाली माँ सरस्वती मेरी रक्षा करें।

आशासु राशीभवदंगवल्ली
भासैव दासीकृतदुग्धसिन्धुम्
मन्दस्मितैर्निन्दितशारदेन्दुं
वन्देSरविन्दासनसुन्दरि त्वाम् (श्लोक 2)

जिनके शरीर की कांति समस्त दिशाओं में बिखरती है, अपनी छवि से जिसने शिव सागर को भी अपना दास बना लिया है. मंद मुस्कान से जिसने शरद ऋतु के चंद्रमा को भी फीका कर दिया है। ऐसी श्वेत कमल के आसन पर विराजमान हे सुंदरी सरस्वती मैं आप की वंदना करता हूं।

शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे
सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं क्रियात् (श्लोक 3)

शरद ऋतु के कमल के समान मुख वाली परमेश्वरी शारदा देवी मेरे मुखमंडल मैं हमेशा हमेशा निवास करें।

सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम्
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: (श्लोक 4)

वाणी की देवी मां सरस्वती को मैं नमस्कार करता हूं जिनकी मात्र कृपा से मनुष्य भी देवता बन जाते हैं।

पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती
प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या (श्लोक 5)

वह सरस्वती जो विशाल बुद्धि रूपी सोने की कसौटी है और जो वाणी से ही बुद्धिमान और मूर्ख का अंतर प्रकट कर देती है।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्
हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् (श्लोक 6)

श्वेत रंग वाली ब्रह्मा के विचार के सार में लगी हुई, आदि शक्ति समस्त जगत में व्याप्त रहने वाली हाथों में वीणा और पुस्तक धारण करने वाली अभयदान को देने वाली तथा मूर्खता के अंधकार को दूर करने वाली हाथों में स्फटिक मणियों की माला धारण करने वाली श्वेत कमलासन पर विराजमान बुद्धि को देने वाली उस परम तेजस्वी मां सरस्वती के चरणों में मैं वंदना करता हूं।


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