पुलवामा हमले की दूसरी बरसी आज/ ४० सी आर पी एफ़ जवान हुए थे शहीद, दर्जनों हुए थे घायल/ भारत ने बालाकोट में हवाई हमला कर ३५० आतंकियों के लहू से लिया था बदला।
देश आज पुलवामा , जम्मू कश्मीर में फरवरी २०१९ में हुए आत्मघाती हमले को याद कर रहा है। आज ही के दिन जब जम्मू से श्रींनगर की ओर सुरक्षा रक्षक ७८ बसों का दस्ता आ रहा था तब उन्ही बसों के बीच एक प्राइवेट गाड़ी जिसमे आत्मघाती सूइसाइड आई ई डी बम फट गया और बसों में मौजूद ४०जवान शहीद हो गए थे। दर्जनों जवान बुरी तरह घायल हो गए थे।
इन ७८ बसों में लगभग २५०० केंद्रीय राखीव सुरक्षा बल यानी सी आर पी एफ के जवान सवार थे। घटना पुलवामा के ,लथेपुरा अवंतीपुरा में घटी थी। यह इलाका कश्मीर के दक्षिणी क्षेत्र में आता है। राष्ट्रीय राजमार्ग एन एच ४४जहां से यह सी आर पी एफ़ के जत्थे को गुजरना था उसे एहतियातन दो दिन पहले ही आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था। जवानों की इन बसों की समूह को शाम होने से पहले ही पहुँचना था पर विस्फोटक से भरी मारुति ईको कार इन्ही में से एक बस के दाहिने तरफ से पटक दी जाती है और पूरा मंजर बदल गया।
पीठ पीछे वार करने वाले कायर पाकिस्तान ने फिर इस घटना में उसके हाथ हैं, यह मानने से इनकार कर दिया लेकिन बाद में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश- ए- मोहम्मद ने इस नरसंघार दुर्घटना की जिम्मेदारी ले ली और सरे आम कहा कि उसी आतंकी संगठन का सब किया धरा है। २२ वर्षीय आतंकी आदिल मोहम्मद डार ने मारुति इको गाड़ी चलाई थी, दोपहर ३ बजे के करीब इस सी आर पी एफ ट्रूप के दाहिने तरफ आ जाती है। इसी कार में वह आत्मघाती आई ई डी बम फट गया और देखते ही देखते बस एक मेटल बॉडी में बदल गई, नजारा खूनी हो गया और दर्जनों जवान बुरी तरह घायल हो गए। ४०से अधिक जवान मौके पर शहीद हो गए।
इस सुइसाइडर बम में अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो ग्लिसरीन और आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। फोरेंसिक जाँच में इस आदिल मोहमद की पहचान भी उसके पिता से हुए डी एन ए सम्पल मिलन के बाद ही हो सकी थी।
यह मारुति ईको जिसका इस्तेमाल जैश ए मोहम्मद ने किया इसे सात अलग अलग लोगो के हाथों बेचा गया था। इस घटना की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी के प्रवक्ता के अनुसार कार के कई हिस्सों को जोड़कर देखने के बाद और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की मदद से ही इस हमले में प्रयुक्त की गई गाड़ी की पहचान हो सकी थी। मारुति ईको चैसिस नंबर MA3ERLF1S00183735, इंजिन क्रमांक G12BN164140 मोहम्मद जलील अहमद हक्कानी को वर्ष २०११ में बेची गई थी जो अनंतनाग के हेवेन कॉलोनी का निवासी था। इसके बाद यह सात बार बेची गई और आखिरी बार मोहम्मद मकबूल भट्ट के बेटे साजद भट ने इसे खरीदा जो अनंतनाग के ही बिजबेहरा का निवासी था। पुलवामा घटना के 10 दिन पहले यानी ४ फरवरी को ही यह गाड़ी साजद ने ली थी। साजद, सिराज उल उलूम, शोपियां का विद्यार्थी था।
इस आत्मघाती दुर्भाग्यपूर्ण घटना के १२ दिन बाद हमारे जवानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में जहां जैश ए मोहम्मद आतंकी संगठन का कैम्प था, वहां हमला बोल दिया और कैम्प को तहस नहस कर दिया था। इस जवाबी हमले में हमारे भारतीय जवानों ने मिराज २००० जेट इस्तेमाल किये और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग ३५० आतंकी मार गिराए गए थे। इसमें हमारे १२ जेट इस्तेमाल किये गए और लाइन ऑफ कंट्रोल पार कर पाकिस्तान में बालाकोट में स्थित आतंकी जैश मोहम्मद के ठिकानों पर हमला बोल दिया।
इस आतंकी संगठन का मुखिया मौलाना मसूद अजहर रहा है।
१ मई २०१९ को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया । १९९४ में अजहर को भारत सरकार ने गिरफ्तार भी किया था।चार साल बाद १९९९ में नेपाल, काठमांडू से दिल्ली आनेवाले हवाई विमान IC814 को हाईजैक कर अजहर सहित तीन आतंकियों की रिहाई की मांग की गई थी। उस समय भारत के विदेश मंत्री जसवंत सिंह थे।
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