वाडिया अस्पताल में जुड़वा बच्चियों का अनोखा मामला-६ घंटे आपरेशन के बाद मिली सफलता/ वाडिया अस्पताल सी ई ओ- पिछले २७ वर्षों में इस तरह का यह चौथा मामला/
मुम्बई के परेल स्थित जेरबाई वाडिया अस्पताल में हाल ही में १४ दिन की जुड़वा बच्चियों का हैरतअंगेज मामला आया जहां डॉक्टरों ने कठिन आपरेशन के बाद दोनों को अलग किया।अब बच्चे पूर्ण रूप से सुरक्षित और सामान्य हैं।
हालांकि जुलाई २०२० में ही माँ वाडिया के डॉक्टरों की निगरानी में थी।सोनोग्राफी से जुड़वा बच्चा होने की बात पता हो चुकी थी। बच्चों के आपस मे छाती, पेट, लीवर जुड़े हुये थे।
दोनों बच्चे 14 दिन के थे जब ३ जनवरी को यह ऑपरेशन किया गया। अब वह पांच हफ्ते के हों चुके हैं। आपरेशन के बाद 2 दिन तक वेंटीलेटर पर उन्हें रखा गया था।
(वाडिया अस्पताल-सी ई ओ: डॉ मिन्नी बोधनवाला)
बच्चों की मां ने बताया कि रूटीन अल्ट्रासाउंड के बाद जुलाई में यह बताया गया और परिवार ने वाडिया में ही आगे की जांच के लिए कहा।वह बहुत डर गई थीं। वाडिया के डॉक्टर उन्हें समय समय पर समझाते रहे और हिम्मत दी। योजना बद्ध तरीके से समय आने पर २१ दिसम्बर को सीजेरियन पद्धति से डिलीवरी हुई।
डॉक्टरों ने कुछ दिन तक बच्चों की स्थिति का निरीक्षण किया। आपरेशन के लिए सभी जरूरी चीजें मुहैया हुई। डिलीवरी के बाद बच्चों को एन आई सी यू में रखा गया। वे उस वक्त ४.२ किलो की थी।सी टी स्कैन से पता चला कि छाती, पेट और संभवतया आंत(लीवर का हिस्सा) आपस मे जुड़े हुए हैं। सबसे बडी चिंता का विषय थी कि एक बच्ची पीली और दूसरी गुलाबी रंग की थी।
बाल चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर प्रज्ञा भेंडरेने कहा कि ट्विन्स बच्चे ओम्फलोपागस की स्थिति में थे। आसान भाषा मे इसे नाभि से जुड़ा हुआ कहते हैं। हालांकि ऐसे मामले 2 लाख जीवित मामलों में से कोई एक होते हैं। ऐसा डॉक्टर भेंडरे का कहना है।
(डॉ-प्रज्ञा भेंडरे: प्रसिद्ध बाल चिकित्सक- वाडिया अस्पताल ,परेल, मुम्बई)
अस्पताल की सी ई ओ मिन्नी बोधनवाला ने कहा कि अस्पताल ने जुलाई २०२०से ही माँ की देखभाल की और उनसे या उनके परिवार से इस पूरे प्रक्रिया के लिए किसी भी तरह का शुल्क नही लिया गया है। उन्हें आज पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
(जेरबाई वाडिया हॉस्पिटल, परेल -मुम्बई)
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