नेताजी की १२५वीं जयंती समारोह में ममता ने भाषण देने से किया इनकार/मंच पर मोदी की मौजूदगी में लगे जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे।अगले तीन महीनों में होना है पश्चिम बंगाल में चुनाव
कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में राजनीतिक माहौल उस वक़्त खराब हो गया जब राज्य की मुख्यमंत्री ने कल भाषण देने से मना कर दिया।
मौका था महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की १२५ वीं जयंती समारोह का। विक्टोरिया हाल में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित पराक्रम दिवस के रूप में हो रहे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, बंगाल से कनिष्ठ केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो , राज्य पाल जगदीप धनखर भी उपस्थित थे।
दरअसल ममता भाषण के लिए जैसे ही उठीं, भीड़ के एक हिस्से से जय श्री राम के नारे लगने लगें।इसे ममता ने अपना अपमान समझते हुए भाषण से इनकार कर सिया।
ममता के अनुसार यदि केंद्र सरकार का कोई कार्यक्रम है, तो उसके लोगों को यह ध्यान देना चाहिए कि अन्य लोगो का अपमान नही होना चाहिए।
ममता और उनकी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता समझते हैं कि जय श्री राम भाजपा का मुद्दा है। ममता ने सिर्फ जय हिंद कहा। हालांकि वह मंच पर बनी रही।
दिल्ली कांग्रेस नेता अजीत रंजन चौधरी आए ममता के समर्थन में
दिल्ली से कांग्रेस लीडर अजित रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के बचाव में पक्ष रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के भाषण से पहले लगे जय श्री राम के नारे यह दिखाने के लिए नही लगे थे कि वह सब भगवान राम से कितना प्रेम करते हैं, बल्कि ममता दीदी को अपमानित करने के लिए लगे थे।
मीडिया से रूबरू होने पर कांग्रेस के नेता अजित चौधरी ने कहा की पद चाहे मुख्यमंत्री का हो या प्रधानमंत्री का , हर पद की अपनी मर्यादा होती है और केंद्र सरकार को इसका ख्याल रखना चाहिए।
कोलकाता में सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम में मोदी जी ने भाषण की शुरुआत में जय हिंद और अंत मे जय हिंद कह कर संबोधन किया।
केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री पटेल के अनुसार कोलकाता में हुए इस केंद्रीय कार्यकम के अतिरिक्त पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नेताजी सुभाष बाबू को उनके पैतृक निवास कटक ,उड़ीसा में अभिवादन किया। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी गुजरात के हरिपुरा में नेताजी बोस के अभिवादन किया।
हरिपुरा वही स्थान है जहां कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस पार्टी के पहले अध्यक्ष चुने गए थे।
मोदी कलकत्ता में आकर पहले नेताजी बोस के घर गए, वहां से नेशनल लाइब्रेरी गए जहां नेताजी के जीवन पर आधारित कार्यक्रमो में शिरकत की और उसके बाद मोदी जी विक्टोरिया मेमोरियल हॉल पहुँचे थे।
(कोलकाता-नेशनल लाइब्रेरी)
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे पहले कल ही सुबह में भारी भरकम रैली की और नेताजी सुभाष बाबू को सत्यवादी राष्ट्रीय नेता बताया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस-संक्षिप्त विवरण
सुभाष बाबू ने तत्कालीन पश्चिम बंगाल प्रेसिडेंसी के कटक में २३ जनवरी १८९७ में जन्म लिया जो वर्तमान में अब उड़ीसा में है।
बता दें कि सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी के हिटलर के सहयोग से इंडियन नेशनल आर्मी का गठन किया। जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फ़ौज बनाई ,जिसके माध्यम से क्रांतिकारियों की टुकड़ी बनाई। जापान के सहयोग से पहली बार फ्री एयर रेडियो के माध्यम से स्वतंत्रता की आवाज़ देश के कोने कोने में पहुंचाई। वह 1938 में कॉंग्रेस के अध्यक्ष बने थे। 1939 में पुनः अध्यक्ष चुने गए लेकिन महात्मा गाँधी से वैचारिक मतभेद के चलते इस्तीफा दे दिया और कॉंग्रेस की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू को मिली। इसके बाद ही उन्हीने फारवर्ड ब्लॉक का गठन किया था। जर्मनी में रहने के दौरान १९३७में नेताजी ने एमिली शंकिल से गुप्त रूप से विवाह किया था पर जनता को १९९३ में इस बात का पता चल सका।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने तिनको में और किसी शर्त के साथ आजादी लेने के विरोधी रहे। सुभाष बाबू का कहना था कि उन्हें आजादी बिना किसी शर्त के और वह भी पूरी चाहिए। उन्होंने जनाग्रह करते हुए नारा दिया था-" तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा।" नेताजी कोलकाता के पांचवे महापौर के रूप में भी कार्यरत रहे।
नेताजी सुभाष बोस को ब्रिटिश हुकूमत ने 1940 के वक़्त घर मे ही नजरबंद कर दिया था।
21 अक्टूबर 1943 के दिन नेताजी ने आजाद हिंद फ़ौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बना दी थी और इस अस्थायी सरकार को जर्मनी, जॉपान, कोरिया, चीन, इटली और आयरलैंड समेत 11 विभिन्न राष्ट्रों ने मान्यता भी दे दी थी। बाद में 1945 में खबर आई कि जापान में प्लेन क्रैश यानी विमान दुर्घटना में नेताजी शहीद हो गए थे।
नेताजी ने ही 'जय हिंद ' का नारा दिया और यही आगे चलकर राष्ट्रीय नारा बन गया।
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