हिन्दू हृदय सम्राट का आज जन्मदिवस, मुख्यमंत्री और बेटे उद्धव ठाकरे ने किया अभिवादन- फोर्ट में किया पुतले का अनावरण/ आजीवन मराठी अस्मिता के लिए लड़े बालासाहेब/ जातिगत आरक्षण का हमेशा किया विरोध/गर्व से कहो हम हिन्दू हैं- उदगार बाळासाहेब की देन
२३ जनवरी १९२६ को केशव सीताराम ठाकरे और रमाबाई ठाकरे के घर पुणे में जन्मे बाल केशव ठाकरे (बाळासाहेब ठाकरे) की आज जयंती है। बाळासाहेब देश के उन वरिष्ठतम विभूतियों में से हैं जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से भले ही कोई अधिकारिक पद न लिया हो पर विचारधारा के चलते करोड़ो लोगो के मन पर राज किया। बाळ ठाकरे एक ऐसे व्यक्तित्व रहे जिन्होंने कभी किसी के दबाव अपना फैसला नही बदला। चाहे अमरनाथ यात्रा में हिन्दू तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का प्रश्न हो, अंडरवर्ल्ड की गिरफ्त से मुम्बई को सुरक्षित करना, भू माफियाओं के अवैध निर्माण को बिना किसी भय के विध्वंस करने का समर्थन देना- जब केंद्र सरकार घुटने टेक देती तो मामला बाळासाहेब अपने अंदाज में सुलझाते थे।
बाळासाहेब के पिता केशव सीताराम ठाकरे भी कार्टूनिस्ट, पत्रकार रहे और १९५० के समय संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़े थे। यही पारिवारिक पृष्ठभूमि रही जिसने बाळासाहेब के जीवन मे राजनीतिक राय बनाई।
(रैली को सम्बोधित करते हुए)
बाळासाहेब के पिता केशव सीताराम ठाकरे भी कार्टूनिस्ट, पत्रकार रहे और १९५० के समय संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़े थे। यही पारिवारिक पृष्ठभूमि रही जिसने बाळासाहेब के जीवन मे राजनीतिक राय बनाई।
(प्रख्यात पॉप स्टार माइकल जैकसन के साथ मुम्बई आने पर मुलाकात के पल-बाळासाहेब )
बाळासाहेब ने जीवन कि शुरुआत भले ही अंग्रेजी अखबार फ्री प्रेस जर्नल से बतौर कार्टूनिस्ट के रूप में की लेकिन किसी के दबाव में काम न करने की आदत ने अधिक समय तक उन्हें टिकने नही दिया। दौर था कांग्रेस शाशन का -बालासाहेब के कार्टून कभी सरकारी मशीनरी पर तो कभी जातिगत आरक्षण व्यवस्था तो कभी अकेले मुम्बई शहर में अन्य राज्यो के लोगो के रोजगार को लेकर मराठी लोगो के बेरोजगार होने का भविष्य पर प्रहार करते थे।
मार्मिक-शिवसेना की स्थापना में मील का पत्थर
उनके कार्टून सिर्फ सच उगलते थे वह भी बिना किसी दबाव और पक्षपात के।
बाळासाहेब ने शिवसेना की स्थापना से पहले स्वतंत्र रूप से मार्मिक पत्रिका निकाली। मार्मिक का संपादन करते समय उन्होंने मराठी अस्मिता, महाराष्ट्र में मराठी समुदाय की उपेक्षा, अन्य राज्य के लोगो द्वारा यहां के रोजगार अवसर को हथियाने और मराठी लोगो के लिए बेरोजगारी पैदा करने को लेकर ज्वलंत मुद्दे उठाए। मार्मिक पत्रिका ने शिवसेना की स्थापना में सबसे बड़ा योगदान दिया क्यों कि यह वह दौर था जब लोग बाळ ठाकरे से सीधे जुड़ गए थे। लोग अपनी शिकायतें उनसे कहने लगे और मार्मिक का असर भी दिखने लगा था।
(सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा, भाजपा प्रवक्ता-प्रमोद महाजन के साथ: बाळासाहेब)
१९६६ में बनाई शिवाजी महाराज की सेना-शिवसेना
शिवसेना की स्थापना १९६६ में हुई ।पृष्ठभूमि थी कि यह हिंदुओं के आराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना है ,न कि कोई राजनीतिक पार्टी। सेना का उद्देश्य मराठी अस्मिता को शिक्षा, रोजगार ,सरकारी और निजी नौकरियों में प्रमुखता आदि रहे। बाळासाहेब ने हमेशा जाति गत आरक्षण का विरोध किया।उनकी नजर में गरीब और अमीर दो ही जाती होती थी और आरक्षण सिर्फ गरीब को मिलना चाहिए ,फिर वह किसी भी जाति से क्यों न हो।१९७० के दौर में तो बाबासाहेब पुरंदरे, माधव महेरे सरीखे बड़े कद के नेता भी शिवसेना में शामिल हो गए थे।
(आवास मातोश्री में - मीडिया से बात करते हुए)
राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च नेता भी करते थे विचारों और फैसले का सम्मान
गुजरात के गोधरा कांड के बाद जिस तरह तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पार्टी से निष्काषित करने की मांग उठने लगी थी ,उस वक्त प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने बाळासाहेब की राय जानने के लिए वरिष्ठम नेता लाल कृष्ण आडवाणी को मातोश्री( बाळासाहेब का निवास स्थल) भेजा था। बाळासाहेब ने अडवाणी से यह कहा कि बेशक यह आपकी पार्टी का फैसला है आप क्या करेंगे, उसमे मुझे बोलने का अधिकार नही पर अगर मोदी पार्टी से निकाले गए तो गुजरात राज्य ,भाजपा हमेशा के लिए गवां देगी। वाजपेयी जी ने ठाकरे के इशारा समझ लिया था।
(होली के अवसर पर मनोहर जोशी को रंग लगाते हुए-बाळासाहेब)
१९९९ में भाजपा के साथ कि राज्य की सत्ता में साझेदारी
शिवसेना भाजपा गठबंधन हिंदुत्व विचारधारा के चलते हुआ था। १९९९ में गठबंधन सरकार ने राज्य में प्रशाशन चलाया। शिवसेना से ही ठाकरे के सान्निध्य में वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी को लोकसभा अध्यक्ष बनने का अवसर भी मिला। राज्य की राजनीति में कई नेता बाळासाहेब के आशीर्वाद से ही मुख्यमंत्री, विधायक ,सांसद और नगरसेवक बने।
वर्तमान में उनके ही पुत्र उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उनके पोते आदित्य पर्यावरण मंत्री हैं।
( तत्कालीन गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के साथ बाळासाहेब)
देश मे ही नही विश्व मे भी होती थी बाळासाहेब की चर्चा-
विष्वविख्यात पॉप स्टार माइकल जैक्सन मुम्बई आने पर ठाकरे से मिले थे और ठाकरे ने जक्सन को चांदी का तबला तानपुरा उपहार स्वरूप दिया था।
(मुम्बई संसदीय चुनाव में वोट देने कर बाद मीडिया के सामने-बाळासाहेब)
आज मुम्बई के फोर्ट स्थित श्यामाप्रसाद मुखर्जी चौक पर बाळासाहेब के पुतले का अनावरण मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, राकांपा अध्यक्ष शरद चंद्र पवार, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे, राज्य कैबिनेट मंत्री बाळासाहेब थोरात, छगन भुजबल, सुभाष देसाई, जयंत पाटिल, एकनाथ शिंदे, दादाजी भुसे, उदय सामंत, असलम शेख, आदित्य ठाकरे शामिल रहे।
No comments
Post a Comment