0 नहीं रहे मशहूर भजन गायक नरेंद्र चंचल 81 वर्ष की उम्र में ली आखिरी सांस दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा था इलाज-कोरोना महामारी पर गाया था आखिरी गाना - Khabre Mumbai

Breaking News

नहीं रहे मशहूर भजन गायक नरेंद्र चंचल 81 वर्ष की उम्र में ली आखिरी सांस दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा था इलाज-कोरोना महामारी पर गाया था आखिरी गाना

नरेंद्र चंचल एक ऐसा नाम जो सुनते ही दिमाग में माता के भजनों की गूंज से शराबोर हो उठता है।नरेंद्र चंचल उर्फ नरेंद्र खरबंदा ने करोड़ों धर्मप्रिय माता के भक्तों के बीच अपनी एक खास जगह बनाई ।
 यूं तो नरेंद्र चंचल ने अपना आशियाना दिल्ली में बनाया क्योंकि वह दिल्ली के कोने कोने में बहुत से माता के भजन और भेटे दे चुके हैं और पंजाबी कौम का अच्छा खासा असर राजधानी दिल्ली में है इसलिए भी उनके गाए हुए भजन और माता की भेंटे  वहां बहुत ज्यादा पसंद किए जाते हैं पर नरेंद्र चंचल ने मुम्बई के बॉलीवुड में भी अपनी आवाज दी । माता के जगराते में नरेंद्र चंचल का दर्जा सुपर स्टार से कम नही था। हजारो लोग सिर्फ  चंचल को देखने के लिए जुट जाते थे।

बॉलीवुड में गूंजी चंचल की जादुई आवाज़-बनाया सभी को दीवाना
७०- ८०के दशक में नरेंद्र ने फिल्म बॉबी में बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो.....बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई ----फिल्म रोटी कपड़ा और मकान ......चलो बुलावा आया है ---फिल्म अवतार , तूने मुझे बुलाया शेरावालिए .....फिल्म आशा... जैसी कई फिल्मों में अपनी आवाज दी ।
उनके गीत हमेशा के लिए अमर हो गए । 

पिछले ही साल अक्टूबर में नरेंद्र चंचल जी ने अपने ८०वें जन्म दिवस पर अपने दिल्ली आवास पर अपने कुछ विशेष मित्रों को बुलाया और उनसे मुलाकात की थी हालांकि जल्द ही उन्होंने विदा भी ले ली थी । उनका इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा था।

मूल जन्मस्थान व परिवार
नरेंद्र चंचल पंजाब के अमृतसर के नमक मंडी इलाके से ताल्लुक रखते हैं। इनके पिता तेजराम खरबंदा छोटे मोटे व्यापारी थे ।बचपन से ही नरेंद्र खरबंदा को संगीत में विशेष रूचि थी और वहीं के क्षेत्रीय संगीतकार प्रेम त्रिखा से संगीत के हुनर सीखे थे। नरेंद्र जी अपने पीछे पत्नी नम्रता, दो पुत्र मोहित व सिद्धार्थ, पुत्री कपिला को छोड़ गए हैं।

कैसे पड़ा नाम चंचल--
उनके ही बताए गए एक वाकये के अनुसार  वह स्कूल में बहुत शरारती थे और उनके एक शिक्षक ने उनका नाम नरेंद्र खरबंदा के बजाय नरेंद्र चंचल रख दिया था तब से नरेंद्र ने यही नाम अपना लिया और लोगों के लिए नरेंद्र चंचल नाम मशहूर हो गया।

कैसे मिला बॉलीवुड में ब्रेक:

13 अप्रैल 1973 को नरेंद्र चंचल मुंबई के कार्यक्रम में भाग लेने आए थे और यहां बुल्ले शाह की रचनाओं को उन्होंने अपनी आवाज में पेश किया उस कार्यक्रम में मौजूद राज कपूर जी ने जब नरेंद्र को सुना तो उन्हें अपनी फिल्म बॉबी में गाने का मौका दिया। और यहीं से नरेंद्र चंचल के हिस्से में बॉलीवुड के कई फिल्म आए। रोटी कपड़ा और मकान, आशा ,अवतार जैसी कई फिल्मों में नरेंद्र भाई ने अपनी आवाज दी।  उन्हें फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड भी दिया गया।उनके गाए हुए माता की भेटें , माता के भजन भारत के करोड़ों देशवासियों के घर में आज भी सुबह शाम गूंजते रहते हैं।
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक जताया है। योगी जी ने भगवान राम से चंचल जी की सद्गति की प्रार्थना की है।

No comments