दोनों शिवसेना की रैली में आरोप प्रत्यारोप । शिवसेना ने की नेस्को ग्राउंड गोरेगांव में ली दशहरा रैली तो शिवसेना यूबीटी ने की शिवाजी पार्क में गर्जना।
किसानों से वोट चोरी और ‘रिजीम चेंज’ तक, दशहरा रैली में उद्धव-शिंदे के बीच जुबानी जंग
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में दशहरा रैली के दौरान शिवसेना के दोनों गुटों के बीच सियासी टकराव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहा। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच किसानों की समस्याओं, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन जैसे मुद्दों को लेकर जुबानी जंग देखने को मिली। दोनों नेताओं के राजनीतिक रुख और बयानों ने राज्य में जारी सियासी संघर्ष को फिर सुर्खियों में ला दिया।
किसानों के मुद्दे पर सियासी घमासान
महाराष्ट्र में किसानों की समस्याएं लंबे समय से राजनीति का अहम मुद्दा रही हैं। फसल खराब होने, कृषि उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने, कर्ज और आर्थिक संकट जैसे सवालों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच लगातार बहस होती रही है। दशहरा रैली में किसानों का मुद्दा भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में रहा। विपक्ष की ओर से किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की राजनीति और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से अपने रुख का बचाव किए जाने के बीच यह मुद्दा अहम बन गया।
वोट चोरी और मतदाता सूची पर सवाल
रैली के दौरान मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा भी चर्चा में रहा। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर उठाए जाने वाले सवाल महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इस मुद्दे पर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; किसी कथित गड़बड़ी को स्थापित तथ्य मानने के लिए संबंधित साक्ष्य और आधिकारिक जांच जरूरी है।
‘रिजीम चेंज’ की चर्चा से बढ़ा राजनीतिक तापमान
‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता या शासन व्यवस्था में बदलाव का मुद्दा भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बहस का हिस्सा बना। शिवसेना में विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच नेतृत्व, पार्टी की पहचान और राजनीतिक विरासत को लेकर संघर्ष जारी है। ऐसे में सत्ता परिवर्तन से जुड़ी बहस का महत्व केवल सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरणों और भविष्य की रणनीति से भी जुड़ा है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि १.३ करोड़ वोटरों के नाम कट गए हैं। जब दूसरे मामलों में कार्रवाई हो सकती है तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सरकार मौन क्यों है? एक सैनिक की पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया और सरकार चुप है।
मोहन भागवत आरएसएस प्रमुख से पूछते हुए उद्धव ने कहा कि यदि तिरंगा लहराना गलत नहीं तो युवाओ पर कार्रवाई क्यों हो रही है?
शिवाजी पार्क इस नाम को १०० साल पूरे हो रहे हैं और बालासाहेब की जयंती को भी १०० वर्ष हो रहे हैं। वक्त है बदलाव का। लोगो को इस बदलाव के लिए आगे आना होगा।
शिवसेना की विरासत और नेतृत्व की लड़ाई
बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत शिवसेना की राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रही है। पार्टी में विभाजन के बाद दोनों गुट अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने और शिवसेना की विचारधारा पर अपना दावा प्रस्तुत करने में जुटे हैं। दशहरा रैली जैसे बड़े राजनीतिक मंच इस संघर्ष को सार्वजनिक रूप से सामने लाने का अवसर बनते हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति के लिए क्या हैं मायने?
किसानों के सवाल, चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाली चिंताएं और सत्ता परिवर्तन की चर्चा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष में इन मुद्दों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। दशहरा रैली के जरिए सामने आई बहस ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि राज्य में राजनीतिक मुकाबला केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, चुनावी विश्वसनीयता और सत्ता की दिशा जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है।
बीते दिन अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद उद्धव ठाकरे ने वर्तमान फडणवीस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए, मौजूदा सरकार सुरक्षा व्यवस्था देने के पूरी तरह फेल हो चुकी है।
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