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कृषि योजना के साथ जोड़ी जा सकती है प्रधानमंत्री कुसुम २.० योजना : रिन्यूएबल एनर्जी सेक्रेटरी संतोष कुमार सारंगी

कृषि योजनाओं के साथ जोड़ी जा सकती है पीएम-कुसुम 2.0 योजना, कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा प्रस्ताव

नई दिल्ली। केंद्र सरकार किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के दूसरे चरण का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत पीएम-कुसुम 2.0 को मौजूदा कृषि योजनाओं के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणालियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें अधिक लाभकारी फसलों की खेती की ओर बढ़ने में मदद करना है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा कृषि मंत्रालय इस प्रस्तावित योजना के विभिन्न पहलुओं पर मिलकर काम कर रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है। उन्होंने कहा, "इन विचारों पर कुछ काम चल रहा है। जब हम इस पर तैयार हो जाएंगे, तब मंजूरी के लिए प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।" उनके मुताबिक, पीएम-कुसुम 2.0 का व्यापक उद्देश्य किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है।

सौर ऊर्जा से किसानों को मिलेगा लाभ

पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने, स्वतंत्र सौर पंप उपलब्ध कराने और पहले से बिजली ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

योजना के मौजूदा ढांचे में तीन प्रमुख घटक हैं।

घटक-ए: इसके तहत किसान 500 किलोवाट से लेकर 2 मेगावाट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। इन संयंत्रों से उत्पादित बिजली वितरण कंपनियों को बेची जा सकती है, जिससे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर पैदा होता है।

घटक-बी: इस घटक के अंतर्गत अधिकतम 7.5 हॉर्स पावर (एचपी) क्षमता तक के स्वतंत्र सौर कृषि पंप लगाए जाते हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य उन किसानों को लाभ पहुंचाना है, जिनके खेतों तक विश्वसनीय ग्रिड बिजली की पहुंच नहीं है।

घटक-सी: इसके तहत पहले से ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की व्यवस्था है। किसान अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होने पर उसे ग्रिड को बेचकर आय अर्जित कर सकते हैं। इसके अलावा, फीडर स्तर पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर एक ही फीडर से जुड़े कई कृषि पंपों को बिजली उपलब्ध कराने का विकल्प भी है।

एग्रीवोल्टाइक व्यवस्था पर भी जोर

योजना के अगले चरण में कृषि भूमि के अधिक प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान दिया जा सकता है। पिछले महीने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने संकेत दिया था कि योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक के लिए एक अलग घटक शामिल किया जा सकता है।

एग्रीवोल्टाइक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें एक ही भूमि का उपयोग खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन, दोनों के लिए किया जाता है। इससे किसानों को कृषि उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा से भी आय प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।

इस पहल में छोटे और सीमांत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा सहकारी संस्थाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल

पीएम-कुसुम 2.0 को मौजूदा कृषि योजनाओं के साथ जोड़ने का उद्देश्य केवल सौर पंपों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में ऊर्जा की उपलब्धता, सिंचाई की दक्षता और किसानों की आय में सुधार करना भी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, बिजली की बिक्री और कृषि भूमि के बेहतर उपयोग के माध्यम से किसानों के लिए आय के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

हालांकि, योजना के दूसरे चरण का अंतिम स्वरूप, वित्तीय प्रावधान और कार्यान्वयन से जुड़ी विस्तृत शर्तें कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगी।

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