पितृ पक्ष आज से आरम्भ/जानिए विशेष
🪔 पितृ पक्ष 2026: कब से शुरू होगा और कब समाप्त होगा?
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का विशेष काल माना जाता है। इस दौरान परिवार के दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य किए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म पितरों के निमित्त समर्पित होते हैं।
📅 पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत और समापन
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर 2026, रविवार से होगी और 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
हालाँकि 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा का पूर्णिमा श्राद्ध रहेगा। इसलिए श्राद्ध पक्ष से संबंधित कर्मों की शुरुआत पूर्णिमा श्राद्ध से मानी जाती है, जबकि कृष्ण पक्ष के नियमित श्राद्ध 27 सितंबर से प्रारंभ होंगे।
उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग परंपरा में इसे सामान्यतः आश्विन कृष्ण पक्ष कहा जाता है। वहीं अमांत पंचांग परंपरा में मास के नाम में अंतर दिखाई दे सकता है। तिथियों के क्रम और श्राद्ध के व्यवहार में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।
🗓️ पितृ पक्ष 2026 की प्रमुख श्राद्ध तिथियां
तारीख वार श्राद्ध
26 सितंबर शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर रविवार प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर सोमवार द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर मंगलवार तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर बुधवार चतुर्थी दोपहर 2:56 तक उपरांत पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर गुरुवार पंचमी श्राद्ध दोपहर 12:36 बजे तक,उपरांत षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर शुक्रवार सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर शनिवार अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर रविवार नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर सोमवार दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर मंगलवार एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर बुधवार द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर शनिवार सर्वपितृ अमावस्या
🌿 चतुर्थी और पंचमी एक ही दिन क्यों?
2026 में तिथि की स्थिति के कारण 30 सितंबर को चतुर्थी एवं पंचमी दोनों श्राद्ध बताए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किस तिथि का श्राद्ध किस प्रकार किया जाए, यह स्थानीय पंचांग में दिए गए तिथि-व्याप्ति और सूर्योदय के नियम के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
इसी प्रकार अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के समय तिथि की स्थिति में अंतर होने से श्राद्ध की तारीख में थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है।
🙏 किस दिन किसका श्राद्ध किया जाता है?
सामान्य रूप से जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का देहांत कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, तो उसका श्राद्ध पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है।
विशेष परिस्थितियों के लिए अलग नियम भी बताए गए हैं। जैसे—
पिता, माता या अन्य परिजनों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार।
अकस्मात या विशेष परिस्थितियों में मृत्यु होने पर संबंधित श्राद्ध-विधि स्थानीय परंपरा और धर्मशास्त्रीय नियमों के अनुसार।
जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो, उनके लिए सामान्यतः सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या को उन अनेक पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है जिनकी तिथि ज्ञात न हो अथवा जिनका नियमित तिथि-श्राद्ध किसी कारण से न हो पाया हो।
🕉️ पितृ पक्ष में क्या किया जाता है?
पितृ पक्ष में अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निम्न कार्य किए जाते हैं:
1. तर्पण
जल, तिल आदि के माध्यम से पितरों का स्मरण और तर्पण किया जाता है।
2. श्राद्ध कर्म
मृत्यु तिथि के अनुसार विधिपूर्वक श्राद्ध किया जाता है।
3. पिंडदान
परंपरा के अनुसार पितरों के निमित्त पिंड अर्पित किए जाते हैं।
4. ब्राह्मण भोजन एवं दान
श्रद्धा के अनुसार भोजन, वस्त्र, अन्न आदि का दान किया जाता है।
5. गौ, कुत्ते एवं अन्य जीवों को भोजन
कई पारिवारिक परंपराओं में भोजन का अंश विभिन्न जीवों के लिए भी निकाला जाता है।
🌺 सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व
10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या होगी। इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है।
जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, उनके निमित्त इस दिन श्राद्ध, तर्पण एवं दान करने की परंपरा अनेक परिवारों में है।
इसी कारण सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
⚠️ स्थानीय पंचांग से पुष्टि क्यों आवश्यक है?
श्राद्ध की तिथि निर्धारित करने में केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि तिथि का सूर्योदय के समय होना, तिथि की समाप्ति, क्षय या वृद्धि तथा स्थानीय सूर्योदय जैसे विषय भी महत्वपूर्ण होते हैं।
इसलिए मुंबई, महाराष्ट्र, दिल्ली, वाराणसी आदि अलग-अलग स्थानों में किसी तिथि के संबंध में समय या तारीख में थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है। अंतिम श्राद्ध-विधि अपने स्थानीय पंचांग और योग्य आचार्य/पुरोहित की परंपरा के अनुसार तय करना उचित रहेगा।
🙏 पितरों के प्रति श्रद्धा
पितृ पक्ष हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और स्मरण का अवसर देता है। इस अवधि में श्रद्धापूर्वक तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करना भारतीय धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
॥ ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः ॥
आचार्य अजय मिश्र
मुख्य पुजारी- विहिप संचालित समर्थ हनुमान टेकड़ी सिद्धपीठ, सायन ,मुंबई
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