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देश का सबसे बड़ा शिपयार्ड बनेगा महाराष्ट्र में

महाराष्ट्र में जल्द बनेगा देश का सबसे बड़ा शिपयार्ड, मझगांव डॉक की भूमिका अहम

मुंबई। महाराष्ट्र के समुद्री क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की दिशा में देश के सबसे बड़े शिपयार्ड की स्थापना की तैयारी तेज हो गई है। प्रस्तावित परियोजना से राज्य में जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत की क्षमता बढ़ने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र, बंदरगाह आधारित उद्योग, समुद्री इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की नीति के बीच देश में स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। महाराष्ट्र, अपनी लंबी समुद्री तटरेखा, प्रमुख बंदरगाहों और विकसित औद्योगिक आधार के कारण इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


मझगांव डॉक का अनुभव बनेगा आधार

मुंबई का मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) देश के प्रमुख रक्षा जहाज निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में MDL की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वदेशी डिजाइन, जटिल जहाज निर्माण, पनडुब्बी निर्माण और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के एकीकरण का इसका अनुभव महाराष्ट्र के समुद्री उद्योग के लिए महत्वपूर्ण परिसंपत्ति माना जाता है।

मझगांव डॉक की विशेषज्ञता के कारण मुंबई और आसपास का क्षेत्र पहले से ही जहाज निर्माण से जुड़े इंजीनियरिंग, मरीन उपकरण, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और अन्य सहायक उद्योगों का केंद्र है। बड़े शिपयार्ड के विकास से इस सप्लाई चेन के और विस्तारित होने की संभावना है।

रोजगार और सहायक उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

बड़े पैमाने पर शिपयार्ड की स्थापना से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है। स्टील, भारी इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उपकरण, पेंट और कोटिंग, इंजन, पाइपिंग तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक शिपयार्ड केवल जहाज बनाने का केंद्र नहीं होता, बल्कि उसके आसपास एक पूरा मरीन इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम विकसित होता है। इसमें डिजाइन कंपनियां, उपकरण निर्माता, तकनीकी सेवा प्रदाता, प्रशिक्षण संस्थान और लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल होती हैं।

रक्षा से लेकर वाणिज्यिक जहाजों तक अवसर

भारत में समुद्री व्यापार बढ़ने के साथ कंटेनर शिप, बल्क कैरियर, टैंकर और अन्य वाणिज्यिक जहाजों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू शिपबिल्डिंग क्षमता बढ़ाने से भारत की विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

महाराष्ट्र में प्रस्तावित बड़े शिपयार्ड को रक्षा जहाजों के अलावा वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण और मरम्मत के लिए भी विकसित किए जाने की संभावनाएं राज्य के समुद्री उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मुंबई से महाराष्ट्र के समुद्री उद्योग को नई पहचान

मुंबई लंबे समय से भारत के समुद्री व्यापार और जहाज निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्रों में रहा है। मझगांव डॉक की स्थापना ने इस क्षेत्र को रक्षा जहाज निर्माण के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई। अब बड़े शिपयार्ड और बंदरगाह परियोजनाओं के विस्तार के साथ महाराष्ट्र के समुद्री औद्योगिक नेटवर्क के और मजबूत होने की उम्मीद है।

यदि प्रस्तावित परियोजना निर्धारित क्षमता और समयसीमा के अनुरूप विकसित होती है, तो महाराष्ट्र देश के जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत उद्योग के प्रमुख केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

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