0 लालबागचा राजा मंडल से प्रसाद, गीले कचरे को रिन्यूएबल एनर्जी में रूपांतरित कर बनेगी बिजली/ सायन, के ई एम अस्पताल के मरीजों के लिए बनेगी सहायक - Khabre Mumbai

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लालबागचा राजा मंडल से प्रसाद, गीले कचरे को रिन्यूएबल एनर्जी में रूपांतरित कर बनेगी बिजली/ सायन, के ई एम अस्पताल के मरीजों के लिए बनेगी सहायक

लालबागचा राजा के प्रसाद का कचरा बनेगा बिजली, KEM और सायन अस्पतालों को मिलेगी नवीकरणीय ऊर्जा!

मुंबई। 
मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले प्रसाद और पूजा सामग्री से निकलने वाला जैविक कचरा अब बेकार नहीं जाएगा। 

लालबागचा राजा मंडल से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 8 से 10 मीट्रिक टन गीले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित कर ७७४४ यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा में (१० दिनों तक) परिवर्तित करने की पहल की जा रही है।

इस पहल के तहत प्रसाद, फूल, फल और अन्य जैविक सामग्री से निकलने वाले गीले कचरे को अलग कर उसका प्रसंस्करण किया जाएगा। जैविक कचरे से ऊर्जा तैयार करने की यह प्रक्रिया न केवल कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाएगी, बल्कि मुंबई में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इससे तैयार होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग केईएम अस्पताल और सायन अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। धार्मिक आस्था से जुड़े प्रसाद को ऊर्जा में बदलने की यह पहल 'वेस्ट टू एनर्जी' की अवधारणा का एक अनूठा उदाहरण बन सकती है।

कचरे से ऊर्जा, पर्यावरण की ओर कदमगणेशोत्सव के दौरान मुंबई में बड़ी मात्रा में फूल, प्रसाद और अन्य जैविक सामग्री निकलती है। ऐसे में गीले कचरे को लैंडफिल में भेजने के बजाय उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण करने से कचरे का बोझ कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन के जरिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी घटाई जा सकती है।लालबागचा राजा की यह पहल धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ती है।

 यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो मुंबई में गणेशोत्सव सहित अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों से निकलने वाले जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन का रास्ता खुल सकता है।

8-10 मीट्रिक टन गीला कचरा → वैज्ञानिक प्रसंस्करण → नवीकरणीय ऊर्जा → KEM और सायन अस्पतालों के लिए उपयोगइस तरह भक्तों की आस्था से निकला प्रसाद अब स्वच्छ ऊर्जा में बदलकर मरीजों की सेवा में सहयोगी होगा।

लालबागचा राजा: 90 वर्षों से मुंबई की आस्था का केंद्र, हर साल उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब

मुंबई के लालबाग इलाके में विराजमान लालबागचा राजा केवल गणेशोत्सव की एक प्रतिमा नहीं, बल्कि देश-विदेश में बसे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक लालबागचा राजा के दर्शन के लिए मुंबई सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मनोकामना पूरी करने वाले गणपति के रूप में प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दरबार में हर वर्ष लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

1934 में हुई थी स्थापना

लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 1934 में हुई थी। लालबाग क्षेत्र में मिलों के बंद होने और वहां काम करने वाले मजदूरों तथा स्थानीय निवासियों के जीवन में आए बदलाव के दौर में गणेशोत्सव ने समुदाय को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी पृष्ठभूमि में लालबागचा राजा की स्थापना हुई और धीरे-धीरे यह गणेशोत्सव मुंबई की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में शामिल हो गया।

मंडल की स्थापना से जुड़ी परंपरा में डॉ. विजय खटाऊ, रामचंद्र तेंडुलकर और स्थानीय मिल मजदूरों की भूमिका का उल्लेख मिलता है। समय के साथ लालबागचा राजा की प्रसिद्धि मुंबई की सीमाओं से निकलकर पूरे देश में फैल गई।

नवसाला पावणारा गणपती’ की पहचान

लालबागचा राजा को महाराष्ट्र में ‘नवसाला पावणारा गणपती’, यानी मनोकामना पूरी करने वाले गणपति के रूप में विशेष श्रद्धा प्राप्त है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं और मन्नत पूरी होने पर दोबारा दर्शन करने की परंपरा भी निभाते हैं।

लालबागचा राजा की प्रतिमा की एक खास पहचान उनका भव्य सिंहासन पर विराजमान स्वरूप है। प्रतिमा के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहते हैं।

आज एक विशाल धार्मिक और सामाजिक संस्था

आज लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल केवल पूजा और उत्सव तक सीमित नहीं है। मंडल विभिन्न सामाजिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों में भी योगदान देता है। गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं की जाती हैं।

सोशल मीडिया और लाइव दर्शन की सुविधा ने लालबागचा राजा की पहुंच को और व्यापक बना दिया है। अब देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन माध्यम से बप्पा के दर्शन कर सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

बढ़ते श्रद्धालुओं के साथ बड़ी मात्रा में फूल, फल और प्रसाद से निकलने वाला जैविक कचरा भी पैदा होता है। इस वर्ष करीब 8 से 10 मीट्रिक टन गीले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित कर नवीकरणीय ऊर्जा में बदलने की पहल भी चर्चा में है। इस ऊर्जा का उपयोग केईएम और सायन अस्पतालों की जरूरतों के लिए किए जाने की योजना है।

इस पहल से धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा को जोड़ने का संदेश मिलता है। लालबागचा राजा की परंपरा अब केवल भव्य उत्सव तक सीमित न रहकर ‘आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी’ की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

मुंबई की पहचान बन चुका है लालबागचा राजा

करीब नौ दशकों की यात्रा में लालबागचा राजा ने मुंबई के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। कभी मिल मजदूरों और स्थानीय लोगों के सामुदायिक उत्सव के रूप में शुरू हुई परंपरा आज देश के सबसे चर्चित सार्वजनिक गणेशोत्सवों में शामिल है।

हर साल गणेशोत्सव के दौरान लालबाग की गलियों में उमड़ता श्रद्धालुओं का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि बदलते समय के बावजूद लालबागचा राजा के प्रति मुंबई और देशभर के भक्तों की आस्था लगातार मजबूत बनी हुई है।

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